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खनियाधाना के 20 शिक्षकों की पिछोर कॉलेज में ड्यूटी, स्कूलों की पढ़ाई पर संकट, बीईओ के आदेश पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले— क्या पिछोर में शिक्षकों की कमी थी? / Shivpuri News

शिवकांत सोनी शिवपुरी। जिले के खनियाधाना विकासखंड में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) विनोद पाठक के एक आदेश को लेकर शिक्षा विभाग में विवाद खड़ा हो गया है। बीईओ ने 3 जुलाई को जारी आदेश में खनियाधाना विकासखंड के 20 शिक्षकों की ड्यूटी पिछोर स्थित छत्रसाल महाविद्यालय में संचालित भोज मुक्त विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए लगा दी। आदेश के बाद क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार खनियाधाना के कई शासकीय विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं तो कई जगह अतिथि शिक्षकों के सहारे पढ़ाई चल रही है। ऐसे में 20 शिक्षकों को दूसरे विकासखंड भेजे जाने से विद्यालयों में अध्यापन कार्य बाधित होने की संभावना है।

आदेश पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों और शिक्षक संगठनों का कहना है कि सामान्यतः विश्वविद्यालय परीक्षाओं में ड्यूटी के लिए संबंधित क्षेत्र या आसपास के शिक्षकों की व्यवस्था की जाती है। यदि अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता हो तो उच्च अधिकारियों की अनुमति से अन्य स्थानों से कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। ऐसे में खनियाधाना से बड़ी संख्या में शिक्षकों को पिछोर भेजे जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

पक्षपात के आरोप

बीईओ विनोद पाठक मूल रूप से पिछोर क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। इसे लेकर कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने गृह क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए खनियाधाना के शिक्षकों की ड्यूटी वहां लगा दी। हालांकि इस संबंध में अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पालकों और ग्रामीणों में नाराजगी

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात करती है, लेकिन नियमित कक्षाओं के दौरान शिक्षकों को दूसरे विकासखंड भेजना छात्रों के हितों के विपरीत है। उनका कहना है कि यदि पिछोर में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध थे तो खनियाधाना के शिक्षकों को भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से मामले की जांच कर आदेश की समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजने और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।

हालांकि, इस पूरे मामले में बीईओ विनोद पाठक का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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