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नपा में कितने माली व सफाईकर्मी, दस महीने में नहीं दी गई जानकारी, देना होगा मुआवजा | Shivpuri News


सूचना के अधिकार के तहत जानकारी न देना नगर पालिका को पड़ा भारी
आईटीआई में शुल्क जमा करने के बाद भी दस महीने से नहीं थी जानकारी
शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका के अधिकारियों द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) का सही ढंग से पालन न करने पर एक आईटीआई एक्टिविस्ट की शिकायत पर मप्र राज्य सूचना आयोग ने इन्हें दंडित किया है। नगर पालिका के अधिकारियों ने आईटीआई एक्टिविस्ट और एडवोकेट अभय जैन को दस महीने में चाही गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके अलावा आवेदक से चाही गई जानकारी की प्रतिलिपि का पूरा पैसा भी जमा करा लिया गया लेकिन दस महीने निकलने के बाद भी यह जानकारी नहीं दी। अब आवेदक अभय जैन की शिकायत के आधार पर मप्र सूचना आयोग ने चाही गई जानकारी निशुल्क देने के अलावा आवेदक को जो मानसिक परेशानी हुई उसके लिए मुआवजा भी देने के आदेश दिए हैं। 
एडवोकेट अभय जैन ने बताया कि उन्होंने शिवपुरी नगर पालिका से दिनांक 14 अगस्त 2018 को दो आवेेदनों के माध्यम से उनके अधीन विभिन्न पार्कों के लिए तैनात माली कर्मचारियों की सूची व उनके पदस्थापना स्थान की जानकारी और सफाई कर्मचारियों की सूची, इनको दिए जाने वाले वेतन स्लिप की छायाप्रतियां मांगी थी लेकिन नगर पालिका के लोक सूचना अधिकारी ने 25 अक्टूबर 2018 को क्रमश: 70 और 20 रुपए की राशि जमा कराने के बाद भी उन्हें चाही गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। आवेदक ने कई बार नगर पालिका कार्यालय के चक्कर काटे लेकिन यह जानकारी नहीं दी गई। बाद में आवेदक ने मप्र सूचना आयोग में इसकी शिकायत की। यहां से 26 जून 2019 को नगर पालिका सीएमओ व संबंधित अधिकारी को आयोग न तलब किया लेकिन वहां पर वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ और एक तृतीय श्रेणी बाबू को आधी-अधूरी व अस्पष्ट जानकारी के साथ भेज दिया गया। मप्र राज्य सूचना आयोग के आयुक्त डीपी अहिरवार ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए नगर पालिका के इस कृत्य को आईटीआई एक्ट का उल्लंघन माना और अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पूरी जानकारी स्पष्ट तरीके से आवेदक को दें और मुआवजा राशि भी प्रदान करें। 

माली और सफाईकर्मियों के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार
आईटीआई एक्टिविस्ट और एडवोकेट अभय जैन ने बताया कि नगर पालिका में माली व सफाईकर्मियों की भर्ती के नाम पर बड़ा गोलमाल हुआ है। इस गोलमाल को छुपाने के लिए ही उन्हें आरटीआई के तहत चाही गई जानकारी देने में आनाकानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि कई माली तो काम ही नहीं कर रहे हैं और उनके नाम से फर्जी तौर पर वेतन निकालकर बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है। इसके अलावा सफाईकर्मियों का भी यही हाल है और इनके दिए जाने वाले वेतन में भी कई विसंगतियां हैं। आर्थिक अनियमिता से जुड़े इस मामले में पूरे दस्तावेज मिलने के बाद वह इसकी शिकायत लोकायुक्त को करेंगे। 

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