बैंगलूर राष्ट्रीय अधिवेशन में नई शिक्षा नीति पर लिए गए महत्वपूर्ण फैसले | Shivpuri News

शिवपुरी। प्राइवेट स्कूलों का पांचवा राष्ट्रीय अधिवेशन बेंगलुरु में 9 जून से लेकर 11 जून को आयोजित किया गया। जिसमें 29 राज्यों के 180 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमें मध्य प्रदेश  से श्री पवन कुमार शर्मा चेयरमैन मध्यप्रदेश व श्री राजकुमार शर्मा अध्यक्ष जिला शिवपुरी ने  भाग लिया। भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सांसद श्री हरी प्रसाद जी एवं पुलिस डीआईजी श्री भास्कर राय एवं इंग्लैंड से पधारी हुई शिक्षाविद डॉ साइना खान एवं प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रकट किए। ।राष्ट्रीय अध्यक्ष  सैयद शमाएल अहमद की अध्यक्षता में सभी लोगों ने नई शिक्षा नीति का पूरे देश में विरोध करने का निर्णय लिया और समिति द्वारा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के सामने अपना विरोध प्रकट करने का प्रस्ताव पास किया ।

नई शिक्षा नीति के विरोध के कारण:-

 1)  नई शिक्षा नीति के लिए बनाई गई ड्राफ्टिंग कमेटी में शिक्षाविदों को नहीं लिया गया है जबकि शिक्षा नीति बनाई जा रही है।

 2) नई शिक्षा नीति के हिसाब से स्कूल चलाने पर  पैरंट्स   पर खर्चे का भार चार से पांच गुना बढ़ जाएगा।

 3) प्राइवेट स्कूल की स्वायत्तता खत्म होने पर प्राइवेट स्कूल भी सरकारी स्कूलों की तरह कागज़ी बनकर रह जाएंगे।

 4) जब प्राइवेट स्कूल सरकार के काम के लिए सहयोग कर रहे हैं तो  प्राइवेट स्कूलों द्वारा पब्लिक वर्ड के प्रयोग पर रोक लगाना गलत है।

5)  प्राइवेट स्कूल को बार-बार मान्यता से मुक्ति मिलनी चाहिए। पुराने स्कूलों को जमीन संबंधी प्रावधान में छूट का प्रावधान होना चाहिए। प्राइवेट स्कूल से जुड़े किसी भी फैसले में प्राइवेट स्कूल प्रतिनिधियों को शामिल करना चाहिए।

6) सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण  प्राइवेट स्कूलों के कामकाज में गिरावट आई है।

स्ट्रेस एजुकेशन की ट्रेनिंग ला सकती है विद्यार्थियों के तनाव में कमी :-पवन कुमार शर्मा

बच्चों में विषम परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता कम होती जा रही है ।तो क्या आज के बच्चों को स्ट्रेस लेना ही नहीं चाहिए? क्या स्ट्रेस बच्चों के लिए खतरनाक है? इसका जवाब है नहीं। हमें बच्चों में ऐसी क्षमताओ का विकास करना है जो उन्हें विषम परिस्थितियों में भी पॉजिटिव एटीट्यूड रखने की प्रेरणा दें। हमें बच्चों को कमजोर नहीं, मजबूत बनाना है जो ना केवल शारीरिक रूप से मजबूत हों बल्कि दिमागी रूप से भी सुदृढ़ हो। ताकि वे विषम परिस्थितियों को आसानी से झेल जाए। इसलिए स्ट्रेस एजुकेशन बच्चों के लिए हानिकारक नहीं बल्कि लाभप्रद भी हैं ।यह बच्चों के विकास में मदद करता है ,बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ाता है ,बच्चों को सफल बनाने में मोटिवेट करता है। अभी हाल ही में सूरत कोचिंग सेंटर में लगी आग में काफी छात्रों को अपनी जान गंवानी ।  हमें छात्रों में पढ़ाई के साथ-साथ इन विषम परिस्थितियों में अपने दिमागी संतुलन को न खोते  हुए उन पर विजय हासिल करने की कलाओं को विकसित करना है और इसी का श्रेय जाता है गीता पब्लिक स्कूल को। जहां छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ इन विषम परिस्थितियों से जूझने व उनपर विजय हासिल करने  पर भी ध्यान दिया जाता है।