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‘डॉक्टर ने कहा…डांस किया तो पांव काटना पड़ेगा, मैंने कहा मंजूर है,


इंदौर,। ईश्वर भी कभी-कभी कठिन परीक्षा लेये मौका बड़ी मुश्किल से मिला था, जिसे मैं किसी हालत में गंवाना नहीं चाहती थी। मगर इलाज कर रहे डॉक्टर अड़ गए। उन्होंने कहा कि डांस करोगी तो पांव काटना पड़ेगा। मैंने कहा…मुझे मंजूर है। आप पांव काट देना मगर परफॉर्मेंस के बाद। खैर…बाद में पांव तो नहीं काटना पड़ा, मगर उसे ठीक होने में वक्त कुछ ज्यादा लग गया। प्लास्टर बंधवाकर मुझे महीनों बेड पर पड़ा रहना पड़ा।

ता है। कुछ लोग हौसला कायम रख वो इम्तेहान पास कर जाते हैं तो कुछ हिम्मत हार जाते हैं। मुंबई की मशहूर लावणी नृत्यांगना देवयानी चंदवडकर का शुमार पहली कैटेगरी के लोगों में होता है। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ती गईं। एक कार्यक्रम के सिलसिले में शहर आई देवयानी ने नईदुनिया लाइव से खास बातचीत में बताया कि करीब 10 साल पहले ट्रेन से उतरते समय फिसल जाने से उनके एक पांव में फ्रैक्चर हो गया था। तीन दिन बाद ही मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित शिवाजी मंदिर में प्रोग्राम था।

अनूठा रहा भंसाली की ‘गब्बर इज बैक’ में लावणी का अनुभव
देवयानी बताती हैं कि शिवाजी मंदिर की उस परफॉर्मेंस के बाद मेरे पास कई बड़े ऑफर्स आए। ‘पवित्र रिश्ता, बाजीराव मस्तानी” जैसे कई सीरियल में परफॉर्म करने के बाद मुझे अक्षय कुमार स्टारर संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गब्बर इज बैक” में भी लावणी करने का मौका मिला। भंसालीजी के साथ काम करने का अनुभव वाकई अनूठा रहा। इस साल मैं कई और हिंदी फिल्मों में भी नजर आने वाली हूं।
‘अरंगेत्रम’ नहीं कर पाने का गम
लावणी के जरिए देश-दुनिया में नाम रोशन कर रही देवयानी मूलत: भरतनाट्यम डांसर हैं। वे साढ़े तीन साल की उम्र से भरतनाट्यम सीख रही थीं। मगर जब ‘अरंगेत्रम’ अर्थात भरतनाट्यम का मंच पर पहली बार एकल प्रदर्शन करने का मौका आया तो उन्हें उसी वक्त सिंगापुर टूर पर जाना पड़ा। देवयानी कहती हैं कि भरतनाट्यम की ही वजह से ही मैं लावणी में इतनी जल्दी सफलता पा सकी हूं। इसलिए अरंगेत्रम पूरा नहीं कर पाने का गम मुझे भीतर ही भीतर सालता रहता है। क्योंकि इसके बाद मुझे स्टेज पर क्लासिकल डांस परफॉर्म करने की भी पात्रता मिल जाएगी।
महिलाओं को खुश देखकर मिलती है खुशी
एक दौर था जब लावणी नृत्य पुरुष ही करते थे और पुरुष ही देखते थे। मगर अब तो लावणी का जिक्र होते ही महिला डांसर्स का ही खयाल आता है। महिलाओं में लावणी इस कदर पापुलर हो चुकी है कि सिर्फ उनके लिए लावणी के स्पेशल शोज होने लगे हैं। ऐसे शोज में महिला डांसर्स को भी बहुत लुत्फ आता है। क्योंकि पुरुषों के सामने जो संकोच होता है, वो महिला दर्शकों के सामने नहीं होता। उनके सामने परफॉर्म करते समय मैं कभी महिलाओं को मंच पर बुलाकर डांस कराती हूं तो कभी उनके बीच जाकर अपने साथ लावणी कराती हूं। उस वक्त उन्हें खुश देखकर मुझे जो खुशी मिलती है, वो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती है।
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