Press "Enter" to skip to content

भावांतर योजना घोटाला- अब राजस्व विभाग के पटवारी, तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में जुटा मंडी बोर्ड

शिवपुरी। कृषि उपज मंडी समिति शिवपुरी में प्रशासनिक सतर्कता से भावांतर भुगतान योजना को पलीता लगने से बच गया और 9.31 करोड़ के भुगतान से ठीक पहले घोटाला उजागर हो गया। खासबात यह है कि प्रशासन द्वारा मंडी सचिव सहित जिन सात लोगों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी यह मंडी बोर्ड के अफसरों को नागवार गुजरा है और वह अपने विभाग की बेइज्जती पचा नहीं पा रहे हैं। 

अब मंडी बोर्ड भोपाल के एसडी वर्मा के नेतृत्व में जांच दल अब अलग स्तर से जांच कर रहा है। प्रशासनिक जांच को ही आधार बनाकर मंडी बोर्ड नई जांच कर रहा है। प्रशासनिक दल के जांच प्रतिवेदन में जिन किसानों के पंजीयन पर प्याज खरीदी की है, उन पंजीयन को गलत बताया है। किसानों के जिन पंजीयनों पर धांधली हुई है, उन्हीं को आधार बनाकर राजस्व विभाग के पटवारी तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया में मंडी बोर्ड लगा है। मंडी बोर्ड संभाग ग्वालियर के संयुक्त संचालक आरपी चतुर्वेदी का कहना है कि हम अपना जांच प्रतिवेदन बनाकर मंडी बोर्ड एमडी को भेजेंगे और एमडी यह प्रतिवेदन शासन को भेजा। उसके बाद शासन द्वारा ही कार्रवाई कर सकेगा। मंडी बोर्ड का मानना है कि इस धांधली की शुरूआत मंडी में आकर नहीं हुई है। बल्कि पंजीयन प्रक्रिया के दौरान ही काफी गड़बडिय़ां रहीं। यदि मंडी बोर्ड के जांच प्रतिवेदन पर शासन कार्रवाई करता है तो संबंधित तहसीलदार और पटवारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। तौल पर्ची पर तुलावटी के हस्ताक्षर होते हैं। जो प्याज कागजों में खरीदी है, उसमें हम्माल-तुलावटियों की भूमिका भी संदिग्ध है। वहीं गेट पास जारी करने वाले मंडी निरीक्षक और खरीदी प्रक्रिया के नोडल अधिकारी भी कार्रवाई की गाज गिरना तय है। 
More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!