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विधानसभा चुनाव में उछलेगा सिंध का पानी और खराब सड़कों का मुद्दा, सत्ता एवं विपक्ष को देना पड़ेगा जबाव

शिवपुरी। शिवपुरी विधानसभा चुनाव में इस बार स्थानीय मुद्दे प्रभावी रहेंगे। जिनका जबाव सत्ताधारी दल और कांग्रेस दोनों को देना पड़ेगा। कांग्रेस को इसलिए क्योंकि नगर पालिका से लेकर जनपद पंचायत और जिला पंचायत पर कांग्रेस का कब्जा है। शिवपुरी में स्थानीय मुद्दे कभी प्रभावी नहीं रहे लेकिन लग रहा है कि 2018 के चुनाव में स्थानीय मुद्दे राजनैतिक दलों की नाक में दम करेंगे और इनका जबाव उन्हें देना पड़ेगा। खासकर युवा मतदाता राजनैतिक दलों से सवाल जबाव करने के  पूरे मूड में नजर आ रहा है। शहरी क्षेत्र में सिंध जलावर्धन योजना का क्रियान्वयन न होना, खराब सड़के, प्रदूषण, सीवेज खुदाई से जनता को परेशानी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे 2018 के चुनाव में प्रभावी रहेंगे। 
शिवपुरी जिले की अन्य विधानसभाओं की तरह शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में भी विधानसभा चुनाव में मुद्दे कभी प्रभावी नहीं रहते। इस विधानसभा क्षेत्र में सिंधिया परिवार का जबरदस्त प्रभाव है और देश और प्रदेश में चल रही लहरों से यह पूरा क्षेत्र अछूता रहता है। इस विधानसभा क्षेत्र में आज तक विकास मुद्दा नहीं बन पाया। लेकिन पिछले 10-15 सालों से इस क्षेत्र में विकास की जो उल्टी धारा बह रही है, उससे परेशान होकर मतदाता इस बार उन सवालों का जबाव चाहेगा। जिससे शिवपुरी विकास की दौड़ में चलती हुई प्रतीत हो। पिछले चुनाव में जनता को कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों द्वारा आस बंधाई गई थी कि शिवपुरी में सिंध जलावर्धन योजना का क्रियान्वयन जल्द से जल्द किया जाएगा। सिंध जलावर्धन योजना 2009 से लम्बित है और आज भी यह योजना पूरी तरह से पूर्ण नहीं हो पाई तथा घर-घर तक सिंध का पानी नहीं पहुंच पाया। महज 5 पानी की टंकियों की कनेक्टीविटी हुई है और शेष 11 टंकियां अभी भी कनेक्ट होना बंाकी है। शहर में वितरण लाईन भी नहीं डाली गई है। इस गर्मी में जनता ने पानी के लिए जितना कष्ट भोगा उसका शब्दों में बयान संभव नहीं है। मतदाता ने विधानसभा में भाजपा और नगर पालिका में कांग्रेस को जिताया। लेकिन इसके बाद भी सिंध के जल की मुराद पूरी नहीं हुई। खराब सडके भी एक बड़ी समस्या हैं। हालांकि सीवेज खुदाई से क्षतिग्रस्त हुई कुछ सड़कों का निर्माण विधायक यशोधरा राजे सिंधिया ने रूचि लेकर कराया। लेकिन पेच ऐसा फंसा कि शहर की पांच प्रमुख सड़के अभी भी नहीं बन पाई। इनमें से कोर्ट रोड़ जो कि शिवपुरी की जीवन रेखा है। उसके न बनने से नागरिक बहुत परेशान हैं। सीवेज खुदाई ने भी शिवपुरी की जनता को इस बार काफी परेशान किया।  शहर में बढ़ता अतिक्रमण और गंदगी भी एक बड़ी समस्या है और कांग्रेस शासित नगर पालिका ने शिवपुरी के विकास स्वच्छता और सुंदरता की दिशा में बिल्कुल भी कदम नहीं बढ़ाया है। जिसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के हालात और भी बद्तर हैं। गांवों में विकास के कोई अधिक काम नहीं हुए और प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। 
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