शिवपुरी। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस और बहुजन समाजपार्टी के बीच गठबंधन की खबर से स्थानीय कांग्रेस में उत्साह का वातावरण है। जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन विधानसभा क्षेत्रों करैरा, पोहरी और कोलारस में बसपा का अच्छा प्रभाव है। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के मैदान में उतरने से कांग्रेस की जीत की संभावनाएं प्रभावित होती हैं। इसी कारण बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन का जिला कांग्रेस अध्यक्ष बैजनाथ सिंह यादव ने स्वागत किया है और दावा किया है कि गठबंधन हो जाने के बाद जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवार विजयी होंगे।
प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में से 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 165 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। जबकि कांग्रेस महज 58 सीटों पर सिमट गई थी। बहुजन समाज पार्टी ने लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़कर चार पर विजयश्री प्राप्त की थी। आंकड़ों के मान से देखे तो बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने 17 विधानसभा सीटों पर 30 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे। जबकि 62 विधानसभा क्षेत्रों में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों के मत 10 हजार से अधिक थे। वोट प्रतिशत की यदि बात करें तो भाजपा ने 44 प्रतिशत मत प्राप्त किए जबकि कांग्रेस ने 36 प्रतिशत मत प्राप्त किए। बहुजन समाज पार्टी ने 7 प्रतिशत मतों पर कब्जा किया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कांग्रेस-बसपा और भाजपा के मत प्रतिशत में महज एक प्रतिशत का अंतर है। जबकि इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को एंटीइंकंबेंसी फैक्टर का भी सामना करना पड़ रहा है। स्पष्ट है कि कांग्रेस और बसपा गठबंधन भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी करने की स्थिति में है। बहुजन समाज पार्टी का प्रदेश में मध्य भारत, विध्य प्रदेश और बुंदेलखण्ड क्षेत्र में प्रभाव है। जहां तक शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों का सवाल है तो बहुजन समाज पार्टी की सर्वाधिक मजबूत स्थिति करैरा विधानसभा क्षेत्र में है। जहां से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी लाखन सिंह बघेल 2003 के विधानसभा चुनाव में जीत भी चुके हैं। श्री बघेल ने भाजपा उम्मीदवार रणवीर रावत को पांच हजार मतों से पराजित किया था। 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव ने 23 हजार से अधिक मत प्राप्त कर दूसरा स्थान प्राप्त किया था। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रमेश खटीक ने 35 हजार से अधिक मत प्राप्त कर जीत हांसिल की थी। उस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बाबू राम नरेश की जमानत जप्त हो गई थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में भी बसपा का प्रदर्शन खासा जोरदार रहा था। हालांकि मुकाबले में बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव तीसरे स्थान पर रहे थे। लेकिन उन्होंने 45 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे। करैरा के बाद बहुजन समाज पार्टी का पोहरी विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक प्रभाव है। 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी पूर्व विधायक लाखन सिंह बघेल को 34 हजार 700 मत हांसिल हुए थे। कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला उस चुनाव में महज 3 हजार 600 मतों से भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती से पराजित हुए थे। यदि उस चुनाव में कांग्रेस और बसपा का गठबंधन हो जाता तो कांग्रेस प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित थी। 2008 के विधानसभा चुनाव में पोहरी से बसपा प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला को 25 हजार से अधिक मत मिले थे और उन्होंने हार के बाबजूद कांग्रेस प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर ढकेल दिया था। 2003 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी द्वारिका प्रसाद धाकड़ को 14 हजार 500 से अधिक मत मिले थे और उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र बिरथरे को पीछे छोड़ते हुए श्री बघेल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया था। उस चुनाव में समानता दल प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला विजयी रहे थे। दूसरा स्थान कांग्रेस प्रत्याशी बैजंती वर्मा को मिला था। उस चुनाव में भी यदि कांग्रेस और बसपा का गठबंधन होता तो कहानी कुछ और होती। करैरा, पोहरी के बाद बसपा का प्रभाव कोलारस विधानसभा क्षेत्र में है। जहां बहुजन समाज पार्टी के प्रतिवद्ध मतदाताओं के मत लगभग 20 हजार हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी चंद्रभान सिंह यादव ने 23 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे। शिवपुरी में बसपा का प्रभाव उतना अधिक नहीं है। लेकिन फिर भी उनके प्रतिवद्ध मतदाताओं की संख्या 10 से 15 हजार है और यह संख्या चुनाव में निर्णायक हो सकती है। पिछोर विधानसभा क्षेत्र में हालांकि बसपा का प्रभाव नहीं है। परंतु इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस बहुत मजबूत है और पिछले पांच विधानसभा चुनाव से कांग्रेस प्रत्याशी केपी सिंह यहां से लगातार जीत रहे हैं।
पांच मेंं से एक सीट मिलेगी बसपा को
सूत्रों की खबर है कि पांच विधानसभा क्षेत्रों में से बहुजन समाज पार्टी को कम से कम एक सीट अवश्य मिलेगी। हालांकि बसपा करैरा और पोहरी सीट पर दावा कर रही है। लेकिन संभावना है कि सीटों के तालमेल में कांग्रेस बसपा के लिए करैरा सीट ऑफर कर सकती है। हालांकि एक तकनीकी बाधा यह है कि करैरा सीट पर वर्तमान में कांग्रेस का कब्जा है लेकिन सच्चाई यह भी है कि इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त एंटीइन्कंबेसी है। विधायक की कार्यप्रणाली को लेकर मतदाताओं में खासा आक्रोश है। पोहरी सीट पर भी लम्बे समय से कांग्रेस जीत की प्रतीक्षा कर रही है और इस सीट पर भी बहुजन समाज पार्टी दावा कर सकती है।







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