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यदि शीघ्र प्रत्यशियों की घोषणा नहीं की, तो बिगड़ जाएगा चुनावी समर…?

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परंपरागत चेहरों से हटकर नए चेहरों की जनता में माँग
उपचुनाव में हार के बाद कोलारस विधानसभा भाजपा के लिए चुनौती
विवेक व्यास, कोलारस। कोलारस उपचुनाव की हार पूरे मध्यप्रदेश के भाजपा संगठन को भारी पड़ी है। इस हार के चलते मध्यप्रदेश की सत्ता और संगठन पर जो प्रतिकूल परिणाम पड़े है उनको उजागर करना भाजपा के लिए संभव नहीं। यदि भाजपा ऐसा करती है तो पूरे प्रदेश में जनता के बीच सही संदेश नहीं जायेगा। इस कारण उक्त हार का प्रभाव भूमिगत रहे वो ही हितकर है।
उपचुनाव की जीत ने जहाँ गुना शिवपुरी सांसद ज्योतिबाबू को कांग्रेस का बेताज बादशाह बना दिया है वहीं हार ने भाजपा सरकार और संगठन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए है। यही कारण है कि उपचुनाव की हार के बाद मध्यप्रदेश संगठन को दरकिनार कर केंद्रीय संगठन ने अपना अधिकार मध्यप्रदेश पर जमा लिया है। जिसकी परिणीत के रूप में सभी निर्णय अब मध्यप्रदेश के भविष्य को लेकर केंद्रीय संगठन की झोली में चले गए। सर्वप्रथम भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को लेकर मध्यप्रदेश संगठन ने जो नाम तय कर रखे थे उन्हें सिरे से ख़ारिज कर अध्यक्ष के रूप में राकेश सिंह की घोषणा करना मध्यप्रदेश संगठन को गहरा झटका है, वही लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह,नरेंद्र सिंह तोमर,प्रभात झा,रामलाल जैसे चेहरों ने मध्यप्रदेश भाजपा का राजनैतिक भविष्य अपने हाथ मे ले लिया।
उक्त उपचुनाव के हार से अभी भी भाजपा सीख नहीं ले सकी। आमचुनाव नजदीक आ गया है किंतु अभी तक भाजपा उम्मीदवार का नाम घोषित न करना गृह कलह को बढ़ाना है। जैसा कि उपचुनाव में हुआ था। वही कांग्रेस के लिए इस प्रकार की कोई परेशानी नही है क्योंकि यहां पूरी तरह सिंधिया का कब्जा है उनके इशारे पर ही कांग्रेस के सिपाही काम करते है। हाँ कांग्रेस गुटवाजी से पीडि़त जरूर है किंतु भाजपा आपसी फूटन से ग्रस्त है।
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