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जिला स्तरीय सम्मेलन में तीन सैंकड़ा स्कूल संचालकों ने बयां की अपनी पीड़ा

कहा- दुर्घटना के बाद ड्राइवर के बजाय स्कूल वालों को ही मानते हैं दोषी
शिवपुरी। जब भी स्कूल बस से दुर्घटना होती है तो बस चालक को दोषी ठहराए जाने के बजाए स्कूल संचालक को दोषी मान लिया जाता है। प्रशासनिक अधिकारी उस निजी स्कूल संचालक से ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे वह अपराधी हो। ऐसा कब तक चलेगा। यह बात रविवार को होटल नक्षत्र में निजी स्कूल एसोसिएशन के सम्मेलन में पीडि़त स्कूल संचालक ने मंच से कहते हुए एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से जवाब मांगा। पदाधिकारियों ने स्कूल संचालक की बात का तत्काल तो जवाब नहीं दिया लेकिन उनका सवाल नोट कर लिया और आगामी दिनों में समाधान की बात कही। 
निजी स्कूल एसोसिएशन के इस जिला स्तरीय सम्मेलन में जिले के 300 स्कूल के संचालकों ने अपनी पीड़ा बयां की। स्कूल संचालकों ने वरिष्ठ पदाधिकारियों से कहा कि जब स्कूली छात्र हर माह अपनी फीस अदा करता है तो बाकायदा उसकी रसीद दी जाती है। लेकिन कुछ अभिभावक अपने बच्चों की फीस ही जमा नहीं करते। जब फीस मांगी जाती है तो जनसुनवाई में जाकर प्रशासनिक अफसरों से शिकायत करने पहुंच जाते हैं कि स्कूल संचालक ने बच्चों को स्कूल से निकाल दिया। अभिभावक की शिकायत सुनने के बाद प्रशासन समझता है कि स्कूल संचालक जानबूझकर ऐसा कर रहा है। उसे गलती के बगैर ही स्कूल की मान्यता समाप्त करने की धमकी मिलनी शुरू हो जाती है। जब बच्चे की फीस ही जमा नहीं है तो हम उसे पढ़ाएं कैसे। आखिर हमें भी तो स्कूल के संसाधनों पर पैसा खर्च करना होता है। स्कूल संचालकों ने वरिष्ठ पदाधिकारियों से कहा कि वह शासन के समक्ष इन बातों को रखें तब कहीं जाकर निजी स्कूल संचालक अपने स्कूलों का बेहतर ढंग से संचालन कर सकेंगे। ब्लॉक अध्यक्ष धीरज शर्मा ने प्रदेश पदाधिकारियों से कहा कि उनकी समस्या का समाधान किया जाए। कार्यक्रम का संचालन अशोक रंगढ ने किया। स्वागत भाषण जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा और आभार शत्रुध्न सिंह तोमर ने व्यक्त किया। 
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