राजस्व विभाग पर कलेक्टर को करना होगा फ़ोकस
कोलारस, विवेक व्यास। भगवान जाने कोलारस राजस्व विभाग के ही यही हालात है या पूरे मध्यप्रदेश में कि विगत 10 माह से कंप्यूटर पर अपने अधिकार को अमल कराने के लिए भटकना पड़ रहा है।।।।।
वेब जीआई सॉफ्टवेयर पर कंपनी द्वारा काम करने के नाम को लेकर कई महीनों से जनता को ऑनलाइन प्रिक्रिया का दंड भोगना पड़ रहा है। कुछ समय तक तो ऑफलाइन काम हुए किन्तु वाद में उन्हें भी बंद कर दिया गया। हाल हि में कंप्यूटर अमल की साइट खुल गई है इसे लगभग 15 दिन हो चुके है । किंतु अब पटवारियों पर पूर्व के काम का इतना अधिक लोड बढ़ गया है और सूखा राहत के चक्कर मे भी वे अब अपनी साइट पर काम ही नही कर रहे है।
परिमार्जन के नाम पर जनता को भ्रमित किया जा रहा है किंतु हालहि में अधिकारी स्तर से किये गए कार्य किस तरह से अमल किये गए क्या इसका राजस्व विभाग कर पास कोई जबाब है।
मुख्य बात ये है कि कोलारस विधानसभा में अशिक्षित और विधि के जानकार नेताओं का अकाल है लगभग सभी ग्रामीण अंचल के नेता मूछों पर ताव देकर नेतागिरी करने की सोच रखते है और अधिकारियों के सामने नियम कायदे की जानकारी न होने के कारण दवाव बनाने में असफल रहते है।
हालहि में स्वंतत्रता दिवस पर कोलारस के अधिकारी अमले द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गाइडलाइन से हटकर पूर्व विधायक की कुर्सी को जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से आगे लगा दिया किन्तु जब युवा नेताओं ने नियमों का हबाला देकर अधिकारियों पर चढ़कर वोले तो सिट्टी पित्ती गुम हो गई और बबाल होता देख नियम अनुसार कुर्सी लगाई गई।।।
राजस्व विभाग कोलारस में कुछ भी नियम से नही हो रहा है किसी भी पटवारी को इधर से उधर करना है तो कोई प्रभारी मंत्री के अनुमोदन की आवश्यकता नही है । मनमाने तरीके से व्यस्थता के नाम पर सब हो रहा हैं।
विगत 10 माह से कंप्यूटर पर अमल नही हो रहा है विगत15 दिन से कुछ हल्कों के पटवारी अमल कर रहे है किंतु अधिकतर परिमार्जन के नाम परअभी भी जनता को बेबकूफ बना रहे है अधिकारी स्तर से कोई अंकुश राजस्व विभाग पर नही रह गया है। सीधे कलेक्टर शिल्पा गुप्ता को अब इस पर फोकस करने की आवश्यकता है। भाजपा के कर्ता धर्ता भी पार्टी की दुर्गति करने पर उतारू है यही कारण है कि इसको लेकर मौन बने बैठे है।
दूसरी ओर सूखा राहत के काम को भी सही से अंजाम देने में कोलारस प्रशासन असफल साबित हो रहा है।जो खाते गड़बड़ हो गए है कई महीने पहले उसकी लिस्ट ओपन नहीं कि जा रही है और उस राशि को इधर उधर न करते हुए एक बड़ी व्यजखोरी की जा रही है । इसका बंदरबांट मिलजुलकर किया ह जा रहा है इसमें पूरा प्रशासन संदेह के घेरे में है क्योंकि जब हर सप्ताह टाइम लिमिट बैठक होती है तो जिला कलेक्टर इस प्रकार ली विसंगतियों पर नजर नही कर पाती या उन्हें अंधेरे में रखा जाता है। परिमार्जन के नाम पर अमल नही हो रहे है पूरा अधिकारिक अमला चुप होना किसी वड़े घपले का संकेत है। या यूं कहें कि भाजपा की कश्ती को जमीदोज करने की अंदरूनी पहल कांग्रेस के दवाब में प्रशासन द्वारा की जा रही है और कोलारस के कमलची भगवाबीर मूक बने रहकर एक बार फिर आगमी चुनाव में उपचुनाव के परिणाम देखने के स्वप्न सजा रहे है। उन्हें तो ये भी जानकारी नही है कि राजस्व के भ्रष्टाचार के कारण विजिलेंस की टीमें यहां नजर बनाए है ।






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