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सिंधिया ने 50 लाख और केपी यादव ने चुनाव में खर्च किए 40 लाख | Shivpuri News


दोनों को उनकी उनकी पार्टी ने खर्चे के लिए दिए थे 50 लाख रूपए
शिवपुरी।  लोकसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 22 जून तक सभी प्रत्याशियों को अपने चुनावी  खर्च का अंतिम ब्यौरा प्रस्तुत करना था। इसी कड़ी में कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जो चुनावी खर्च का ब्यौरा प्रस्तुत किया है उसके अनुसार चुनाव में उनके 49 लाख 91 हजार 653 रूपए खर्च हुए हैं जबकि विजयी भाजपा प्रत्याशी केपी यादव का खर्चा उनसे 10 लाख कम अर्थात् 39 लाख 22 हजार 882 रूपए हुआ है। दोनों प्रत्याशियों को अपनी अपनी पार्टी से 50 लाख रूपए खर्च के लिए मिले थे। लोकसभा चुनाव में खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रूपए है। दोनों प्रत्याशियों द्वारा पेश किए गए खर्चे का विवरण जिला निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट के साथ प्रदेश निर्वाचन कार्यालय में जमा हो गया है। 
कांग्रेस प्रत्याशी सिंधिया को 50 लाख रूपए की राशि खर्च के लिए कांग्रेस ने दी थी इसके अलावा उन्हें 2 लाख 74 हजार रूपए का चुनावी मटेरियल अर्थात प्रचार सामग्री भी दी गई थी। केपी यादव को 50 लाख रूपए भाजपा से मिले थे। चुनावी खर्च का अन्य प्रत्याशियों ने जो विवरण दिया है उनके अनुसार अंबेडकर पार्टी के अमित खरे ने 42 हजार 550 रूपए, मनीष श्रीवास्तव ने 1 लाख 28462 रूपए खर्च किए जिनमें से उन्होंने बताया कि 36 हजार 900 रूपए दान में मिले। आजाद भारत पार्टी की रेखाबाई ने 80 हजार 220 रूपए, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संतोष यादव ने 42 हजार 850, निर्दलीय अजय सिंह ने 25 हजार 150, चंद्रकुमार श्रीवास्तव ने 6 लाख 81 हजार 447 रूपए खर्च किए जिनमें 6 लाख 70 हजार रूपए उन्हें दान में मिलना बताया गय था। भूपेंद्र चौहान ने 7 लाख 23 हजार 115, ओपी भईया ने 6 लाख 71 हजार 252 और हरभजन सिंह ने 34 हजार 100 रूपए खर्च किए। 

बसपा प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह ने नहीं दिया खर्च का विवरण
चुनाव के दौरान बसपा प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह राजपूत कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में चुनाव मैदान से हट गए थे, लेकिन ईव्हीएम में प्रत्याशी के रूप में उनका नाम दर्ज था इसलिए खर्च का विवरण उन्हें भी पेश करना था, परंतु बसपा प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह राजपूत और निर्दलीय भान सिंह ने अपने खर्च का विवरण प्रस्तुत  नहीं किया है। जिसके कारण जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 51 की धारा 10 क के तहत नोटिस दिया है। नोटिस का जवाब संतोषजनक न देने पर दोनों प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित करने की कार्यवाही की जा सकती है। 

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