
जैसा की आप लोगों को पता है पिछले विशेषांक में हम लोगों ने किताब वाले नेता जी के बारे में सुना है कमल वाले दल से कई और लोग भी जोर आजमाइश में लगे हुए हैं जैसे कि डॉक्टर साहिबा। डॉक्टर साहिबा का नाम तो कई लोगों की जुबान पर है, लेकिन डॉक्टर साहिबा एक बाहरी प्रत्याशी होने के कारण लोगों का उतना रुझान नहीं, लेकिन फिर भी धाकड़ बाहुल्य क्षेत्र है किरार समाज का एक तरफा वर्चस्व है, अगर किताब वाले नेता जी पीछे होते दिखाई देते हैं तो डॉक्टर साहिबा को भी टिकट की उम्मीद लगी हुई है।
इसके बाद कमल दल से यशोधरा गुट से कुशवाहा जी का नाम निकल कर आ रहा है कुशवाहा जी ने घूम घूम कर लोगों की समस्याओं का निराकरण करवा करवा कर लोगों को कहीं ना कहीं अपने प्रति आकर्षित कर लिया है क्षेत्र में अपना बजन भी बढ़ा है और जनता उनको एक दूसरी आंख से भविष्य का विधायक भी देख रही है और टिकट मिले ना मिले लेकिन जीत हार में कुशवाहा जी की बजनदारी तो काम करेगी बिना कुशवाहा जी के जीत पाना बमुश्किल सपना ही रहेगा चाहे कोई भी लड़े।
अब बात करते हैं यादव समुदाय में कहीं भी यादव समुदाय का भी इस क्षेत्र में बाहुल्य तो है चाहे वह दूसरे या तीसरे क्रमांक पर भले ही है लेकिन लेकिन अगर एकता हो जाए तो हालत खराब करने की ताकत रखते हैं इसीलिए किसान संघ वाले नेता जी का नाम भी कमल दल से लिया जा सकता है दूसरी चीज किसान संघ में उस क्षेत्र में अपनी पकड़ भी नेता जी ने बना ली है और अगर किसान एकतरफा झुकता है किसान संघ की तरह और यादव समुदाय भी साथ देते हैं तो कांटे बिछाने में यह भी कम साबित नहीं होंगे। बाबू जीत के लिए इनका साथ भी बहुत जरूरी है। यह अपने दम पर भी सीट निकालने की क्षमता रख सकते हैं
बात करते हैं पंडित जी की, पंडित जी भी यशोधरा गुटके के खासमखास भी माने जाते हैं क्योंकि सीट पर ज्यादातर महल का प्रभाव रहता है। महल का वर्चस्व इतना है कि विधायक बिना महल के नहीं बन सकता। पंडित जी भी पिछले 2 वर्षों से क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाने में लगे हुए। समय-समय पर कार्यक्रम कराना जनता की मदद करना और अगर पंजे वाले दल से कोई किरार समुदाय का प्रत्याशी उतरता है तो बिल्कुल ही यहां पर किसी न किसी पंडित जी को टिकट देना पड़ेगा और पंडित जी का टिकट पंडित जी को ही मिल जाएगा इसलिए कमल वाले दल से पंडित जी तो सिर्फ जमीन वाले पंडित जी को ही मिलेगा।





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