
शिवपुरी। हमें नौकरी दो या मृत्यु दो। लिखी तख्तियां लेकर दो
सैकड़ा से अधिक पात्रता परीक्षा में चयनित युवक-युवतियों ने विरोध प्रदर्शन
कर 5 घंटे तक नारेबाजी की। खास बात यह रही कि चयनित युवाओं ने आक्रोश
जताकर कहा कि हमने जब शिक्षक बनने की योग्यता हासिल कर ली तो फिर हमें
नौकरी क्यों नहीं। मामाजी हमारी सुध ले लो नहीं तो हमारी अनदेखी आपको महंगी
पड़ेगी। यह नाराजगी जिले भर के पात्रता परीक्षा पास नौकरी की बाट जोह रहे
उम्मीदवारों ने विरोध प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में
कही।
शुक्रवार को कलेक्टोरेट में 5 घंटे तक चले बेरोजगार युवक युवतियों के विरोध
प्रदर्शन में शिक्षक बनने की चाहत रखने वाले दो सैकड़ा से अधिक युवाओं ने
विरोध प्रदर्शन किया। नाराज युवाओं ने कहा कि मप्र में विधानसभा चुनाव 2018
के पहले स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कल्याण विभाग ने प्रोफेशनल
एग्जामिनेशन बोर्ड पीईबी के माध्यम से संयुक्त पात्रता परीक्षा का आयोजन
किया था। इस परीक्षा में उच्च माध्यमिक शिक्षक एचएसटी परीक्षा में 19 हजार
220 पद पर और माध्यमिक शिक्षक एमएसटी के लिए 11 हजार 374 पद पर नियुक्ति
निकाली थी।
जिसकी परीक्षा के बाद दस्तावेजों के
सत्यापन की प्रक्रिया भी आरंभ हुई, लेकिन 1 साल बीत जाने के बाद भी भर्ती
प्रक्रिया सत्यापन पर ही अटकी है। जिससे हमारी नियुक्तियां आज दिनांक तक
नहीं हो सकी हैं। पहले मान लिया कि कोरोना के चलते नियुक्ति रोकी हों।
लेकिन अब तो कोरोना के भी इक्का दुक्का केस निकल रहे हैं। नेता चुनावी सभा
ले गए और सब खोल दिया। बस नहीं खोली तो हमारी भर्ती प्रक्रिया। इससे हम सब
परेशान हैं और चाहते हैं कि हमारी परेशानियों का समाधान हो।
इसलिए
मामाजी भानजे- भानजियों की सुन लीजिए। कहीं यह विरोध में आ गए तो फिर
तांडव हो जाएगा और इसकी जिम्मेदार सरकार रहेगी। नाराज आवेदकों ने कहा कि
जल्द न केवल नियुक्ति प्रक्रिया की नई तारीख और भर्ती प्रक्रिया शुरू करें
अन्यथा हम और उग्र प्रदर्शन करने मजबूर होंगे। कुछ आवेदकों ने तो यहां तक
कहा कि हमारे बैनर पर लिखी इबारत पढ़ लो या तो हमें नौकरी दो या फिर हमें
मृत्यु दे दो। ज्ञापन देने वालों में रमन पुरोहित, शैलेश रहोरा, शिखा पाठक,
मनीषा शर्मा, रक्षा सोनी, संजय गुप्ता, दीपमाला त्रिपाठी, उमा पुरोहित,
नूरजहां, गीता भटट, सुखवीर वंशकार, सुनील, नीतू कोली, सत्यांश गुप्ता, सहित
दो सैकड़ा से अधिक आवेदक मौजूद थे।
2008 के बाद 13 साल गुजर गए लेकिन भर्ती प्रक्रिया नहीं हो सकी
पात्रता
परीक्षा उत्तीर्ण आवेदकों ने बताया कि 2008 के बाद 13 साल गुजर गए, लेकिन
भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। आखिर हम कब तक इंतजार करें। शासन ने
अतिथि शिक्षकों को रखने की योजना बना ली है। ऐसे में हम तो फिर लटक जाएंगे।
यदि हमारी नहीं मानी तो हम और उग्र प्रदर्शन करने बाध्य होंगे।
नौकरी के इंतजार में घुट- घुट कर कहां तक मरें
प्रदेश
के मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर कार्यालय में सौंपा ज्ञापन।अंत में प्रदेश
के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एक ज्ञापन आवेदकों ने प्रदेश के
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम ज्ञापन सौंपकर कहा कि हमारी मांगे
मान लीजिए वरना हमें मौत दे दीजिए। रोज-रोज नौकरी के इंतजार में घुट घुट कर
कहां तक मरें।






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