ग्राम करमाच की रहने वाली प्रसूता राजकुमारी को सुबह पेट मे दर्द हुआ। इसके बाद स्वजन ने 108 एंबुलेंस को बुलाया। रात में हुई बहुत अधिक बारिश के कारण एंबुलेंस उनके घर तक पहुंच ही नहीं पाई। दरअसल गांव जाने वाले रास्ते की नदी चढ़ गई थी जिससे वाहन का निकलना संभव नहीं था। इसके बाद ऊफान पर आई नदी को प्रसूता के साथ स्वजनों ने पार किया और जैसे-तैसे एंबुलेंस तक पहुंचे। इसके बाद राजकुमारी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जब अस्पताल में भर्ती कराने के लिए पर्चा बनवा रहे थे तब ही उसे पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। इसके बाद वहां मौजूद कर्मियों से स्वजनों ने स्ट्रेचर लाने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने खुद मरीज को मैटरनिटी वार्ड में ले जाने के लिए स्ट्रेचर ढूंढा, लेकिन नहीं मिला। इसके बाद राजकुमारी ने ट्रॉमा सेंटर के प्रांगण में खुले में ही बच्ची को जन्म दे दिया। लापरवाही की एक ओर बानगी बच्ची के जन्म के बाद भी देखी गई। बच्ची के जन्म के बाद भी उसे स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं की गई। प्रसूता को व्हील चेयर पर बैठाकर जच्चा-बच्चा वार्ड ले जाया गया।

उफनती नदी पार कर पहुंचे जिला अस्पताल, स्ट्रेचर तक नहीं मिला तो ट्रॉमा में हो गई डिलीवरी / Shivpuri News
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