शिवपुरी। जिले के करैरा तहसील अंतर्गत ग्राम जयनगर के दर्जनों ग्रामीण मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे और कलेक्टर को आवेदन सौंपकर आबादी क्षेत्र में किए गए कथित पट्टे को निरस्त करने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील स्तर पर सांठगांठ कर आबादी की भूमि का पट्टा कर दिया गया है, जिससे वर्षों से बसे परिवारों के सामने बेदखली का खतरा पैदा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, सर्वे नंबर 370/3, 370/4 और 370/5 की भूमि पर पिछले करीब 50 वर्षों से आदिवासी, लोधी एवं अन्य समाज के परिवार निवास कर रहे हैं। इसी भूमि पर आंगनवाड़ी केंद्र, शासकीय माध्यमिक विद्यालय और सरकारी चौपाल भी स्थित है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हल्के पुत्र देवलाल लोधी और उनकी पत्नी उषा बाई लोधी ने कथित रूप से तहसील स्तर पर सांठगांठ कर अपने नाम से पट्टा प्राप्त कर लिया है। इसके बाद वे वर्षों से बसे लोगों को वहां से हटाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और असंतोष है।
आवेदन में ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि आबादी क्षेत्र का पट्टा किस आधार पर स्वीकृत किया गया और मौके पर जांच क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि शासन की मंशा भूमिहीन परिवारों को पट्टा देने की होती है, जबकि जिन लोगों के नाम पट्टा हुआ है उनके पास पहले से ही जयनगर और राजगढ़ में लगभग 40 बीघा निजी भूमि होने का दावा किया गया है। इसकी जांच कराने की भी मांग की गई है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित पट्टे की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि अनियमितता पाई जाए तो उसे तत्काल निरस्त किया जाए तथा वर्षों से निवास कर रहे परिवारों को बेदखल होने से बचाया जाए।






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