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महिला स्व-सहायता समूहों ने कलेक्टर से लगाई गुहार: पोषण शक्ति निर्माण योजना में गड़बड़ियों और मनमानी के लगाए आरोप, पंजीयन के नाम 10 हजार की मांग / Shivpuri News

शिवपुरी। जिले के विभिन्न विकासखंडों में संचालित महिला स्व-सहायता समूहों ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (मध्याह्न भोजन) के संचालन में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक मनमानी को लेकर कलेक्टर से शिकायत की है। प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ (म.प्र.) की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कई गंभीर आरोप लगाते हुए हस्तक्षेप की मांग की गई है।

महासंघ की जिला अध्यक्ष रूबी पराशर ने बताया गया कि वर्ष 2008 से महिला स्व-सहायता समूह मध्याह्न भोजन निर्माण एवं वितरण का कार्य नियमों के अनुसार कर रहे हैं। इसके बावजूद जिला पंचायत द्वारा जारी आदेश के माध्यम से समूहों को एसआरएलएम पोर्टल पर पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिसका समूहों ने विरोध किया है।


ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि एसआरएलएम पोर्टल पर पंजीयन के नाम पर समूहों से 10 से 10 हजार रुपये तक की अवैध राशि मांगी जा रही है। समूहों ने पोर्टल प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

महिला समूहों का कहना है कि मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ी शिकायतों की जांच बीआरसीसी, बीएसी और सीएसी स्तर के अधिकारियों से न कराकर जिला पंचायत के अधिकारियों से कराई जाए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। साथ ही जांच के दौरान समूह अध्यक्ष और सचिव के बयान लेने तथा रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।


ज्ञापन में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के बावजूद मध्याह्न भोजन कार्य का अग्रिम भुगतान नहीं किया जा रहा है। समूहों का आरोप है कि फरवरी 2026 से अब तक रसोईया-सह-सहायिकाओं के मानदेय का भुगतान नहीं हुआ, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है।


महिला समूहों ने आरोप लगाया कि जिले की उचित मूल्य दुकानों से जून 2026 तक का खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया गया है, जबकि आवंटन जारी हो चुका है। इससे समूहों को भोजन संचालन में परेशानी हो रही है।

ज्ञापन में कहा गया है कि सांझा चूल्हा योजना के तहत संचालित समूहों को मिलने वाले खाद्यान्न का सही उठाव नहीं हो रहा है। आरोप है कि कुछ सेल्समैन स्वयं हस्ताक्षर कर खाद्यान्न उठा लेते हैं और बाद में समूह संचालकों को खाद्यान्न नहीं मिलने की जानकारी देते हैं।

महिला स्व-सहायता समूहों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर समस्याओं का शीघ्र निराकरण किया जाए, ताकि समूहों का संचालन सुचारू रूप से हो सके।

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