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कोलारस में रफ्तार का कहर: कंटेनर ने बस का इंतजार कर रहे ससुर को कुचला, मौके पर मौत; डेढ़ किमी तक कंटेनर पर टंगा रहा दामाद / Shivpuri News

शिवपुरी। राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर शिवपुरी बाईपास एक बार फिर से खूनी साबित हुआ, जहां रफ्तार के कहर ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। आज सुबह लगभग 11:00 बजे कोलारस से इंदौर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे फूड सेफ हाकम परिहार (निवासी चंदोरिया) को एक तेज रफ्तार अनियंत्रित कंटेनर nl01aj5957 ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि हाकम परिहार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। लेकिन इस खौफनाक मंजर के बीच उनके दामाद होशियार परिहार के साथ जो हुआ, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था। हादसे के वक्त दामाद ने जैसे ही मौत को करीब देखा, उसने सूझबूझ और बहादुरी दिखाते हुए भागते कंटेनर के पिछले हिस्से को पकड़ लिया और उस पर टंग गया। मौत की रफ्तार के बीच होशियार परिहार लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर भड़ोंता ब्रिज से आगे तक कंटेनर पर ही लटके रहे।
जब कंटेनर चालक की नजर पीछे टंगे होशियार पर पड़ी, तो उसने उन्हें गिराकर मारने की नीयत से कंटेनर को डिवाइडर की तरफ दबाने का प्रयास किया। इसी कोशिश में ड्राइवर गाड़ी पर से नियंत्रण खो बैठा और तेज रफ्तार कंटेनर बीच वाले सेंट्रल वर्ज के गड्ढे में जा गिरा। गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होते ही ड्राइवर और क्लीनर मौका पाकर वहां से रफूचक्कर हो गए।
इस दर्दनाक हादसे के बाद सिस्टम की एक बेहद संवेदनहीन और लाचार तस्वीर भी सामने आई। घटना के तुरंत बाद जब बदहवास परिजनों ने आपातकालीन सेवा एम्बुलेंस को कॉल किया, तो घंटों बीत जाने के बाद भी एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। इस दौरान मृतक की बेटी और बेटा भी रोते-बिलखते मौके पर आ गए और सड़क पर पड़े पिता के शव के पास बैठकर एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे। आखिरकार, जब सिस्टम से उम्मीद टूट गई तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। कोलारस पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम किया, मामले को विवेचना में लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और हाईवे अथॉरिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनएच 27 का यह बाईपास पॉइंट अब पूरी तरह से “डेथ जोन” में तब्दील हो चुका है। इससे पहले भी इसी जगह को क्रॉस करते समय मंडल अध्यक्ष के भतीजे अपनी जान गंवा चुके हैं और कही लोग घायल हो चुके है हर हादसे के बाद वादे तो बहुत होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। लगातार हो रही मौतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। अब जनता सीधे तौर पर सवाल पूछ रही है कि क्या प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए किसी और बड़ी मौत का इंतजार है

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