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रामबाबू गड़रिया ने बनाया था हवस का शिकार:पीड़िता बोली- कहा था मत करवाना मेडिकल परीक्षण, पुलिस से मिलकर व धमकी देकर दिलवाए थे झूठे बयान / Kolaras News

कोलारस थाना क्षेत्र के राई गांव से 14 सितंबर को गांव के ही युवक रामबाबू गड़रिया द्वारा नाबालिग का अपहरण कर उसे जंगल में अपनी हवस का शिकार बनाया। पीड़िता के अनुसार इसके बाद उसने और उसके जीजा बंटी सहित मामा ने पुलिस को पैसे देकर तथा उसे डरा-धमकाकर उससे झूठे बयान दिलवाए तो महिला एसआई शिखा तिवारी ने उसे कहा कि तुम अपना मेडिकल परीक्षण करवाने से मना कर देना और इस बात के लिए अपने परिवार वालों को भी राजी कर लेना।

एक रात व एक दिन जंगल में बिताए, दी धमकी

पीड़िता का कहना है कि आरोपी रामबाबू ने मेरे अपहरण के बाद एक रात व एक दिन जंगल में बिताए, उसके बाद पैदल-पैदल खरई पहुंचे। वहां से ट्रक में सवार होकर कोटा और कोटा से इंदौर जा रहे थे, तभी उज्जैन पर रामबाबू के जीजा का फोन आ गया कि तुम लोग वापस आ जाओ, मैं तुमको लेने आ रहा हूं।

बकौल पीड़िता आरोपी रामबाबू उसे वापस कोटा ले आया, जहां से उसके जीजा कार से उसे सिरसौद चौराहे के पास किसी अज्ञात गांव में ले गए तथा वहां उसको बंधक बना कर न सिर्फ उसके साथ दुष्कर्म किया गया बल्कि धमकी भी दी कि पुलिस को बयान देना की तुम अकेली गई थीं, अन्यथा तुम्हारे भाई को मरवा देंगे।

पुलिस को पैसे पहुंच गए, वो तुमको आकर ले जाएगी

पीड़िता ने बताया कि आरोपी के जीजा और मामा ने बताया कि हमने पुलिस तक पैसे पहुंचा दिए हैं, पुलिस तुमसे कुछ नहीं कहेगी। बकौल पीड़िता रामबाबू के मामा ने उससे कहा कि हम तुमको पडोरा पर छोड़ देंगे और 15 मिनट बाद पुलिस वहां से तुमको ले जाएगी और उन्होंने ऐसा ही किया। उनके छोड़ने के कुछ देर बाद पुलिस आई और मुझे थाने ले गई।

मैं रोती रही, नहीं मिलने दिया

पीड़िता की मां का कहना है मुझे मेरी बेटी के लिए इंसाफ चाहिए। पुलिस ने आरोपियों से मिलकर झूठे बयान करवा लिए और मैं थाने की चौखट पर बैठकर रोती रही, मुझे मेरी बेटी से मिलने तक नहीं दिया।

यह आरोप निराधार हैं

वहीं कोलारस टीआई आलोक भदौरिया ने बताया कि लगाए गए सभी आरोप पूर्णतः मिथ्या हैं। हम ऐसा क्यों करेंगे, लड़की अपने परिजनों के खिलाफ थी, उनके साथ जाना ही नहीं चाह रही थी। मेडिकल कराने तैयार नहीं थी, बड़ी मुश्किल से मेडिकल करवाया है। अब यह आरोप निराधार हैं।

एसआई शिखा तिवारी ने बताया कि मैंने खुद पीड़िता की मां की सहमति लेकर मेडिकल परीक्षण करवाया है। लड़की मेडिकल करवाने तैयार ही नहीं थी। मैं अब भी लड़की व उसके परिवार वालों को बयान के लिए बुला रही हूं, लेकिन वह आने को ही तैयार नहीं हैं। आरोपों की जांच कराई जा सकती है, यह आरोप पूर्णतः निराधार हैं।

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