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अभाविप ने प्रोफेसर के खिलाफ किया आंदोलन, कॉलेज में डाला ताला / Pichore News

प्रोफेसर को खदेड़ने, जान से मारने की धमकी देने को लेकर अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज 
पिछोर। पिछोर महाविद्यालय में दतिया से स्थानांतरित होकर आए प्रोफेसर एसएस गौतम के विरोध में शनिवार को अभाविप ने जमकर हंगामा किया। नारेबाजी, प्रदर्शन करते हुए कॉल्ेज में ताला डाल दिया। मौके पर एसडीओपी देवेंद्र कुशवाह, एसडीएम केआर चौकीकर सहित पुलिस को जाना पड़ा। इसी दौरान जब प्रो. गौतम कॉलेज पहुंचे तो उनका रास्ता रोककर विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्हें कॉलेज से खदेड़ दिया गया, प्रोफेसर का कहना है कि इसी दौरान एक विद्यार्थी ने उन्हें खदेड़ा तो पीछे से कुछ युवकों ने उन पर प्रहार किया। जिससे उन्हें मुंदी हुई चोटें आईं हैं। उनका यह भी आरोप है कि छात्रों ने उन्हें महाविद्यालय में नहीं घुसने दिया और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई। छात्र प्रोफेसर के विरुद्ध नारेबाजी कर रहे थे इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कराया है। टीआई अजय भार्गव का कहना है कि एससीएसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। बता दें कि आंदोलन प्रदर्शन के दौरान प्रोफेसर के पक्ष में मैदान में उतर आई थी और एसडीएम को ज्ञापन देते हुए कहा कि एसटीएससी वर्ग से होने के कारण प्रोफेसर को नौकरी नहीं करने दे रहे यह बात ठीक नहीं है। जिसके बाद प्रोफेसर थाने पहुंचे थे और फिर केस दर्ज कराया। 
छात्रा ने भी अभद्रता को लेकर दिया आवेदन
इधर दूसरी तरफ एक छात्रा ने भी पुलिस को आवेदन सौंपा है और कहा है कि आज जब हम लोग प्रोफेसर का विरोध कर रहे थे तभी प्रोफेसर ने उनका हाथ पकड़कर झटक दिया और धक्का-मुक्की की तथा अभद्रता करते हुए उनके साथ मौजूद लोगों ने अभद्रता की। नेहा भट्ट की तरफ से यह आवेदन दिया गया है। पुलिस ने आवेदन लेने के बाद जांच किए जाने की बात कही है। 
अभाविप आंदोलन के बाद प्रोफेसर को भेजा ग्वालियर
पिछोर महाविद्यालय में दतिया के जिस प्रोफेसर को बीते रोज तबादला कर भेजा गया था उन्हें शनिवार को दो माह के लिए ग्वालियर के अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ग्वालियर संभाग कार्यालय में बुला लिया गया है। अपर आयुक्त उच्च शिक्षा भोपाल चंद्रशेखर बालिंवे के आदेश के मुताबिक प्रशासकीय कार्य के लिए प्रोफेसर डॉ. एसएस गौतम ग्वालियर रहेंगे। बता दें कि अभाविप ने प्रोफेसर को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे और 
आंदोलन किया था जिसके नतीजे में यह बदलाव अमल में आया है।
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