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शिवपुरी विधानसभा से तीन बार चुनाव जीतने वाली केबिनेट मंत्री यशोधरा राजे के शिवपुरी से चुनाव लड़ने पर असमंजस

पोहरी अथवा कोलारस से चुनाव लड़ने की अटकलेें तेज

शिवपुरी। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार चुनाव जीत चुकी वरिष्ठ भाजपा नेत्री और प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के इस बार अपनी राजनैतिक कर्मस्थली शिवपुरी से चुनाव लड़ने पर संशय बना हुआ है। सूत्र बताते हैं कि शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों में से सिर्फ शिवपुरी विधानसभा सीट ऐसी है जहां से यशोधरा राजे का टिकट पक्का माना जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी यशोधरा राजे ने शिवपुरी से चुनाव लड़ने पर खुद ही प्रश्र चिन्ह लगाया है। यशोधरा राजे ने अपने पिछले दौरे में कार्यकर्ता बैठक में साफ साफ कहा कि वह शिवपुरी से चुनाव लड़ेंगी अथवा नहीं यह निश्चित नहीं है, लेकिन मैं शिवपुरी छोड़ने से पहले सबकुछ ठीक कर देना चाहती हूं ताकि जो भी यहां से विधायक बने उसे किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि यशोधरा राजे शिवपुरी से चुनाव नहीं लड़ी तो कोलारस अथवा पोहरी से चुनाव लड़ सकती हैं। हाल ही मेें दोनों विधानसभा क्षेत्रों के यशोधरा राजे के दौरे से इन संभावनाओं को बल मिला है। 
शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र यशोधरा राजे की राजनैतिक कर्मस्थली है। इस क्षेत्र में वह सन 1989 से सक्रिय है और तब से अब तक जितने भी विधायक यहां से निर्वाचित हुए है  उन्हें जिताने में यशोधरा राजे सिंधिया का अहम योगदान रहा है। स्व. सुशील बहादुर अष्ठाना से लेकर देवेंद्र जैन, माखनलाल राठौर की जीत उनके खाते में है। यशोधरा राजे स्वयं इस विधानसभा क्षेत्र से सन 1998, 2003 और 2013 के विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। 2007 के उपचुनाव में विजयी हुए वीरेंद्र रघुवंशी की जीत में भी प्रत्यक्ष नहीं तो अप्रत्यक्ष रूप से उनका सहयोग रहा है। उपचुनाव में मुख्यमंत्री सहित समूची भाजपा पार्टी प्रत्याशी गणेश गौतम को जिताने में जुटी थी, लेकिन नाराजगी के चलते यशोधरा राजे ने प्रचार से दूरी बना ली थी। इस विधानसभा क्षेत्र में यशोधरा राजे का खासा जनाधार है। वह तीनों चुनाव भारी बहुमत से जीतती रही हैं। सन 1998 में वह साढ़े 6 हजार मतों से कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला को हराकर जीती थी वहीं अगले विधानसभा चुनाव 2003 में उनकी जीत का अंतर बढ़कर लगभग 4 गुना हो गया था और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गौतम को 25 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था, लेकिन वह 2003 से 2008 का अपना कार्यकाल पूर्ण नहीं कर पाई और ग्वालियर लोकसभा उपचुनाव लड़ने के लिए वह ग्वालियर चली गईं तथा उनके त्यागपत्र देने से रिक्त हुई सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र रघुवंशी विजयी हुए। 2008 में यशोधरा राजे सिंधिया ने मेहनत कर भाजपा प्रत्याशी माखनलाल राठौर को जिताया और 2013 में वह स्वयं कांग्रेस के मजबूत  प्रत्याशी वीेरेंद्र रघुवंशी से 11 हजार से अधिक मतों से जीतीं। चुनाव जीतने के बाद यशोधरा राजे सिंधिया को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्योग, खेल, युवक कल्याण एवं धर्मस्व विभाग का मंत्री बनाया। हालांकि बाद में उनसे उद्योग विभाग ले लिया गया जिसकी कसक यशोधरा राजे सिंधिया के मन में आज भी है। यशोधरा राजे सिंधिया को कैबिनेट मंत्री बनने के बाद भी अपने इस कार्यकाल में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सीवेज खुदाई से सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और शिवपुरी में प्रदूषण से जनजीवन परेशान हुआ। हालांकि यशोधरा राजे सिंधिया के प्रयासों से महत्वपूर्ण सड़कें बनी, लेकिन इसके बाद भी पीडब्ल्यूडी और नगरपालिका की निष्क्रियता के कारण काफी सड़कें बनना अभी भी शेष रहीं। शिवपुरी में सिंध का पानी लाने के लिए यशोधरा राजे सिंधिया ने बहुत मेहनत की। किसी तरह वह शिवपुरी बायपास तक सिंध का पानी लाने में सफल भी रही, लेकिन इसके बाद सिंध जलावर्धन योजना का घटिया निर्माण कार्य इस हद तक बाधक हुआ कि लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया। सड़कें और पानी यशोधरा राजे सिंधिया के लिए सिरदर्द बने रहे। हालांकि उन्होंने टीम बनाकर शहरवासियों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन नगरपालिका के कर्ताधर्ता हमेशा उनके रास्ते में रोड़े बनकर आते रहे। यशोधरा राजे को कसक है कि जिस परिमाण में उन्होंने शिवपुरी में मेहनत की उस हिसाब से उन्हें श्रेय नहीं मिला और पानी न आने के लिए नगरपालिका के स्थान पर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। 

भाजपा के सर्वे में यशोधरा राजे का टिकट पक्का

चुनाव से पूर्व भाजपा ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर सर्वे कराया। उस सर्वे में कई मंत्रियों की हालत काफी खस्ता बताई गई, लेकिन शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से यशोधरा राजे सिंधिया की स्थिति मजबूत बताई गई है और यह माना जा रहा है कि उनके टिकट पर किसी तरह का संकट नहीं है। 

नपाध्यक्ष पद पर हरिओम राठौर के हारने की है कसक 

नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में यशोधरा राजे ने भाजपा प्रत्याशी हरिओम राठौर को जिताने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाया था, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सके और उनके स्थान पर जनता ने कांग्रेस प्रत्याशी मुन्नालाल कुशवाह को विजयी बनाया। इसकी पीड़ा यशोधरा राजे के मन में है। उनके नजदीकी सूत्रों का मानना है कि यदि नगरपालिका भी भाजपा की होती तो सड़क ओर पानी की समस्या निपट गई होती। शहर में विकास न होने के लिए नगरपालिका जिम्मेदार है, लेकिन जिम्मेदार यशोधरा राजे को बताया जा रहा है जो कि सही नहीं है।
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