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ब्रज की होली… गुलाल लगाया ठाकुर जी के गालों पर: अबीर-गुलाल की बौछार हो रही भक्तों पर /#उत्तरप्रदेश

कमर में बंधे फेंटा में से प्रसादी गुलाल लेकर पुजारियों ने भक्तों पर बौछार की।

कहते है कि ‘सब जग होरी, जा ब्रज होरा’ यानी ब्रज की होली सबसे अनूठी और निराली है। आज ऐसा ही ब्रज के मंदिरों में दिख रहा है। शुरुआत ठाकुर जी के गालों पर गुलाल लगाने से हुई है। अब भक्तों पर गुलाल-अबीर डाला जा रहा है। भक्त नृत्य कर रहे हैं। जयघोष लग रहे हैं।

मान्यता ऐसी है कि वृंदावन के राधा बल्लभ मंदिर में भगवान कमर में फेंटा बांधकर उसमें गुलाल रखते हैं। जिसे प्रसाद स्वरूप मंदिर के पुजारी भक्तों पर डालते हैं।

सबसे पहले तीन तस्वीरें देखिए…

हुरियारे के रूप में राधा वल्लभ का श्रृंगार
ठाकुर राधा वल्लभ मंदिर के सेवायत अंचल गोस्वामी ने बताया,”फुलैरा दौज को सुबह भगवान ने श्वेत पोशाक धारण की। इसके बाद उनका हुरियारे की तरह श्रृंगार किया गया। उनकी कमर में फेंटा बांधा और उसमें रखा गया गुलाल। ठाकुर जी के गालों पर गुलाल लगाया गया।

इसके बाद कमर में बंधे फेंटा में से प्रसादी गुलाल लेकर पुजारियों ने भक्तों पर गुलाल की बौछार की गई। इसी के साथ मंदिर में अबीर गुलाल की होली की धूम शुरु हो गई है।

आज से मंदिरों में खेला जाएगा रंग
इस दौरान भक्त ठाकुर जी के प्रसादी गुलाल के रंग में सराबोर होकर नृत्य कर रहे हैं। पूरा मंदिर परिसर भगवान के जयकारों से गुंजायमान हो रहा था। ब्रज में होली की शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है। बसंत पंचमी के दिन अबीर-गुलाल उड़ाए जाने के बाद से फुलैरा दौज तक मंदिरों में सिर्फ होली के पदों का गायन किया जाता है।

फुलैरा दौज से ठाकुर जी की कमर में फेंटा बांध कर कपोलों (गाल) पर गुलाल लगाने के साथ मंदिरों में होली गायन के मध्य रंग से होली खेलने की शुरुआत हो जाती है।

इन मंदिरों में भी खेली जा रही होली
राधा बल्लभ मंदिर के अलावा वृंदावन के सेवा कुंज, राधा दामोदर मंदिर, राधा श्याम सुंदर मंदिर, प्रिया बल्लभ मंदिर में भी रंग बिरंगी होली खेली जा रही है। द्वारिकाधीश मंदिर में नगाड़ों की थाप के बीच होली के पदों का गायन किया जा रहा है।

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