
शिवपुरी। नगर पालिका में हर विभाग में अधिकारी अपनी
मनमानी से नियुक्तियां कर रहे हैं। पार्षदों और अध्यक्षों ने खुद के हित
साधने के लिए अपने चहेतों को पंप अटेंडर बनाकर हर महीनों का लाखों को बोझ
बढ़ा दिया। वहीं दूसरी ओर पालिका के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर
अकांउट विभाग को प्रभार दे दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका में
सहायक ग्रेड-3 क्लर्क दिनेश गुप्ता को लेखापाल बना दिया। जबकि नगर पालिका
में इस पद के लिए कई अन्य वरिष्ठ बैठे रह गए। 6 महीने से ज्यादा समय से
गुप्ता इस पद पर हैं। नियम कहता है कि विषय परिस्थितियां होने पर 45े दिनों
के लिए किसी को प्रभारी पद दिया जा सकता है। लेखापाल बने कर्मचारी भाजपा
नेता के रिश्तेदार भी हैं।
कई जगह हैं अनियमितताएं
नगर
पालिका में मनचाहे प्रभार देने और अपने चहेतों को अस्थाई तौर पर रखने के कई
मामले हैं। इसके पहले चंद्रशेखर गौतम लेखापाल थे। कोरोना को देखते हुए
इन्हें तीन महीने का एक्सटेंशन दिया गया था। यहां भी नियम तोड़े गए थे। बाबू
का काम विषम परिस्थितियों में नहीं आता है। इसकी शिकायत भोपाल हुई तो गौतम
को हटा दिया गया। इसके बाद इस पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठाया गया जिसे
लेखापाल के काम की कोई जानकारी नहीं है। वह आराम से अधिकारियों के कहे
अनुसार काम करे इसलिए नियमों को ताक पर रख दिया गया।
इनका कहना है
मुझे तो वे पहले से ही अकाउंटेंट के पद पर मिले हैं। इन्हें मेरे कार्यकाल में प्रभार नहीं दिया गया है।
– गोविंद भार्गव, प्रभारी सीएमओ।






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