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बेटियों ने मेहनत कर बढ़ाया मां-बाप का मान

खतौरा गांव के सामान्य परिवार में जन्मी दो बेटियां शिक्षक तो तीसरी बनी एसआई

शिवपुरी। आमतौर पर आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में रूढिवादी परंपरा के चलते बेटियों के जन्म को ही अभिशाप माना जाता है उस पर भी बेटियां पढ़ लिख जाएं और नौकरी हासिल कर लें तो इसे लेकर तंज कसने वालों की भी कमी नहीं है। कोलारस क्षेत्र के ग्राम खतौरा के रहने वाले शिक्षक भरोसाराम गोलिया व उनकी पत्नी संगीता की बेटियों ने ग्रामीणों के तंज को चुनौती मानकर वो मुकाम हासिल किए कि आज मां-बाप का सिर बेटियों के जन्म पर गर्व से ऊंचा हो गया है। सबसे बड़ी बेटी पुष्पलता वह कमलेश अध्यापक है तो वहीं छोटी बेटी भी प्रिंयका भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है। परिवार को सबसे ज्यादा उस समय ग्रामीणों की टीका टिप्पणी झेलनी पड़ी जब चौथे नंबर की बेटी आशा ने पुलिस अधिकारी बनने के लिए तैयारी शुरू की ग्रामीण लड़की के पुलिस में जाने को लेकर तमाम तरह के तंज कसते रहे, लेकिन  आशा ने इन सभी को नजर अंदाज कर जीतोड़ मेहनत की और पहले ही प्रयास में मप्र सब इंस्पेक्टर पुलिस परीक्षा में चयनित हो गई। वर्तमान में आशा श्योपुर जिले में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। बेटियों के इस हुनर पर मां-बाप को नाज है। खासबात यह है कि चार बेटियों के बाद जन्मा बेटा हेमंत भी पढऩे में अव्वल है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। 
कल तक कसते थे तंज आज दे रहे बधाई
समाज के लोगों का रवैया भी वक्त के साथ किस तरह बदल जाता है इसकी नजीर इस परिवार को लेकर मिलती है बेटियों की नौकरी और पढ़ाने को लेकर जो ग्रामीण कल तक तंज कसते थे वे आज पुष्पलता, कमलेश व हाल ही में सब इंस्पेक्टर बनी आशा की काबिलियत को सराहते व बधाई देते नजर आते हैं। 
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