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मान्यता के बिना स्कूल में दिए जा रहे हैं बच्चों को एडमिशन



लुभावने प्रलोभनों के माध्यम से अभिभावकों को किया जा रहा है आकर्षित
मामला विवेकानंद हायर सेकेण्डरी स्कूल शिवपुरी का

शिवपुरी। आज के समय में शिक्षा का पूरी तरह से व्यवसायीकरण हो चुका है और प्रतिवर्ष दर्जनों स्कूल खुल रहे हैं जिनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना है, न कि शिक्षा के स्तर को बढ़ाना। जिला प्रशासन ने बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों के विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश भले ही दे रखे हों, लेकिन शिवपुरी शहर में कई स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। स्कूल संचालकों में शासन-प्रशासन का लेसमात्र भी खौफ नहीं है। ऐसा ही मामला ग्वालियर वायपास पर स्थित विवेकानंद हायर सेकण्डरी स्कूल शिवपुरी का सामने आया है। सूत्रों की मानें तो स्कूल संचालक द्वारा बिना मान्यता के नर्सरी से कक्षा 12 वीं तक बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा है। खासबात यह है कि स्कूल संचालक द्वारा बेखौफ अंदाज में होर्डिंग्स बैनर और पैम्पलेट के माध्यम से अभिभावकों को लुभाया जा रहा है और उन्हें कम फीस का लालच दिया जा रहा है। स्कूल संचालक के झांसे में अभिभावक आ भी रहे हैं। जबकि अभिभावकों को इस बात की भनक नहीं है वह अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए जिस स्कूल में उन्हें दाखिला दिला रहे हैं वहां उनका भविष्य संवरने की बजाय अंधकार में चला जाएगा। कुल मिलाकर स्कूल संचालकों द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए नौनिहालों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

हॉस्टल की सुविधा के नाम पर खिलवाड़
विवेकानंद हासे स्कूल संचालक द्वारा हॉस्टल के नाम भी अभिभावकों से मोटी रकम ऐंठी जा रही है। स्कूल संचालक के हौंसले इतने बुलंद हैं कि स्कूल चलाने तक की तो मान्यता है नहीं, फिर भी हॉस्टल तक की सुविधा देने के नाम पर अभिभावकों की गाढ़े पसीने की कमाई के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

नहीं है एनसीआरटी की मान्यता
स्कूल संचालक द्वारा अपनी पेम्पलेस्ट्स में दर्शाया गया है कि उनके पास एनसीईआरटी पेटर्न से इंग्लिस मीडियम नर्सरी से कक्षा 5 तक की सुविधा है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि स्कूल संचालक द्वारा केवल अभिभावकों को भ्रमित कर अपना उल्लू सीधा किया जा रहा है। स्कूल संचालक का एक ही मकसद है कि चाहे कुछ भी करना पड़े स्कूल में बच्चों के एडमिशन हो जाएं फिर चाहे कुछ भी अंदाज हो।

विभिन्न संकायों में दिए जा रहे एडमिशन
स्कूल संचालक द्वारा कक्षा 11 वीं और 12 वीं में छात्र-छात्राओं को विभिन्न संकाय कृषि विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, कॉमर्स, आर्ट में प्रवेश दिया जा रहा है। स्कूल संचालक द्वारा अभिभावकों को लालच दिया जा रहा है कि उनके स्कूल में शहर के अन्य स्कूलों की तुलना में बहुत कम फीस में बच्चों को पढ़ाया जाएगा  और उन्हें सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। अभिभावक स्कूल संचालक के जाल में फंसकर अपने बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं।

नहीं है इस तरह यह कोई पहला मामला
यहां बताना होगा कि इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है कि जबकि किसी स्कूल संचालक द्वारा बिना मान्यता के बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा हो। इससे पूर्व में भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। होता यह है कि प्रारंभ में तो स्कूल में बच्चों की बकायदा क्लासेस संचालित की जाती हैं और जब परीक्षाओं का समय आता है तो स्कूल संचालक द्वारा हाथ खड़े कर दिए जाते हैं और उस समय बच्चों और अभिभावकों के पास कोई रास्ता ही नहीं बचता।

मान्यता प्राप्त स्कूलों की विभाग क्यों नहीं करता सूची जारी?
यहां सोचनीय पहलू यह है कि स्कूल संचालकों द्वारा बार-बार अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी करने की खबरें समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती हैं और अभिभावकों द्वारा भी शिकायतें की जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची क्यों नहीं जारी की है? यह एक बड़ा सवाल है। अगर विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची जारी कर दी जाए तो आमजन के सामने स्कूल संचालकों की हकीकत सामने होगी और वह ठगी का शिकार होने से भी बच सकेंगे।

क्या कहते हैं स्कूल संचालक
मेरे द्वारा स्कूल नर्सरी से कक्षा 8 तक ही खोला गया है। अभी मान्यता के लिए आवेदन एप्लाई किया है।  मैं तो कोचिंग पढ़ाता हूं और 9,10,11,12 को कोचिंग पढ़ाऊंगा।
विष्णुप्रसाद धाकड़, स्कूल संचालक

इनका कहना है

-हमारे पास इस तरह के स्कूल की कोई फाइल नहीं है, अगर लिखित में शिकायत आएगी तो मामले की जांच कराई जाएगी।
अंगद सिंह तोमर,
बीआरसी शिवपुरी

-आपके द्वारा इस तरह का मामला मेरे संज्ञान में लाया है। मामले को दिखवाया और जांच कराकर उचित कार्यवाही की जाएगी।
परमजीत सिंह गिल
जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी    

                                                                                                                                            


अगर इस तरह का कोई मामला है तो इसकी डीईओ से जांच कराई जाएगी और मामला सही पाए जाने पर उचित कार्यवाही की जाएगी।
नीतू माथुर, जिला पंचायत सीईओ

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