
शिवपुरी। मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के तहत अधिसूचित कृषि उपज मण्डी शिवपुरी में प्याज एवं लहसून के क्रय-विक्रय की शिकायत को शासन ने गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच हेतु कलेक्टर शिवपुरी को निर्देश दिए गए थे।
कलेक्टर श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने जांच हेतु 6 सदस्यीय दल का गठन कर जांच कराई गई। जांच के दौरान दल को गंभीर अनियमितताए पाए जाने पर कलेक्टर द्वारा सहायक संचालक उद्यानिकी शिवपुरी को मण्डी सचिव शिवपुरी रविन्द्र शर्मा, लायसेंस प्रभारी श्रीमान जायसवाल, मण्डी निरीक्षक प्रांगण प्रभारी राजकुमार शर्मा, सहायक उपनिरीक्षक मनोज आर्य, सहायक उपनिरीक्षक भगवान दास भिलबार, सहायक उपनिरीक्षक सहायक वर्ग तीन व्रजेश शर्मा एवं सहायक उपनिरीक्षक श्री राकेश गुप्ता सहित योजना में अन्य अज्ञात मण्डी अधिकारी एवं कर्मचारी, अज्ञात व्यापारियों एवं अज्ञात किसानों के विरूद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए है।
उल्लेखनीय है कि प्रमुख सचिव कृषि विभाग द्वारा प्याज एवं लहसून फसल की भावांतर भुगतान योजना के तहत पंजीकृत किसानों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान के विक्रय के परीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देशों के पालन में कलेक्टर श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने 6 सदस्यीय जांच दल गठित कर दल द्वारा जांच की कार्यवाही की गई। जांच के दौरान जांच दल द्वारा व्यापारियों के भण्डारण गृहों, मण्डी कार्यालय की ओर से जारी किए जाने वाले प्रवेश पर्ची, अनुबंध पत्र, तौल पर्ची, भुगतान पर्ची, अनुज्ञा पत्र, ई-उपार्जन बेवसाइड पर मण्डी कार्यालय द्वारा किसानों की कि गई खरीदी के डाटा एन्ट्री, किसानों के पंजीयन, किसानों द्वारा पंजीयन में दर्शाए गए सर्वे नम्बरों का सत्यापन मैदानी स्तर पर किया गया।
जिसमें यह तथ्य सामने आए कि ऐसे कृषक जिनके द्वारा प्याज एवं लहसून की फसल पंजीयन में उल्लेखित सर्वे नम्बरों में फसल बोई ही नहीं गई थी। लेकिन मण्डी रिकॉर्ड के अनुसार बेचना पाया गया है। दल को जांच के दौरान ऐसी फर्म भी पाई गई। जिनके द्वारा लायसेंस के वक्त गोदाम भण्डारण का दिए गए पते पर गोदाम नहीं पाया गया, बल्कि आवासीय भवन मिले। फर्मों द्वारा खरीदी एवं विक्रय किए गए प्याज एवं लहसून में भी हजारों क्विंटल का अंतर मिला। जांच दल के सामने यह भी तथ्य सामने आया कि जिला शाजापुर एवं राजगढ़ मण्डी के किसानों द्वारा भी शिवपुरी मण्डी में आकर टेक्टर-ट्रोली से प्याज एवं लहसून की बिक्री की गई। जबकि शिवपुरी से इनकी दूरी लगभग 200 से 280 कि.मी. होने पर टेक्टर-ट्रोली से परिवहन किया जाना संभव ही नहीं है। मण्डी कार्यालय द्वारा जारी होने वाली प्रवेश पर्ची और व्यापारी द्वारा जारी की जाने वाली भुगतान पर्ची में एक टेक्टर में 324 क्विंटल प्याज बेचना बताया गया है, जबकि 324 क्विंटल प्याज एक ट्रोली में आना संभव नहीं है। कुछ फर्मों द्वारा हजारों क्विंटल प्याज एवं लहसून क्रय करना पाया गया है। जबकि उक्त फर्मों द्वारा मण्डी टेक्स जमा न कर टैक्स की चोरी करना जांच दल के सामने आया है। कुछ फर्मों द्वारा भावांतर भुगतान योजना का अनुसूचित लाभ लेने के उद्देश्य से मण्डी सचिव द्वारा खरीदी प्रारंभ सप्ताह के दौरान नवीन लायसेंस जारी किए गए है, जो पूर्णता गलत है।






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