
शिवपुरी। लोकतंत्र कहने तो एक ऐसी व्यवस्था का नाम है जिसका संचालन लोगों या उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा किया जाता है, लेकिन आज सत्ता या कुर्सी की ताकत इतनी होती है कि यही जनता के लिए चुने गए जनता के प्रतिनिधि नियम कायदों को जैसे अपनी जेब में रखकर घूमते हैं और जिनके ऊपर इनसे नियमों के पालन कराने की जिम्मेदारी होती है वह भी इनके आगे बौने साबित होते हैं, यही है वर्तमान में सत्ता की ताकत और हुकूमत। इसकी जीती जागती नजीर शिवपुरी में देखने को मिल रही है। पूरे प्रदेश सहित शिवपुरी जिले में आचार संहिता लागू हो चुकी है और आचार संहिता के पालन कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है जिसका मुखिया कलेक्टर होता है। शिवपुरी के पोलोग्राउण्ड में 9 अक्टूबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पालक संयोजकों को संबोधित करने आ रहे हैं, लेकिन उनके आने से पहले शहर की सुंदरता को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सड़कों के गड्ढों को भरा जा रहा है, लेकिन प्रशासन आंख बंद करके आचार संहिता की धज्जियां उड़ते हुए देख रहा है या फिर यह भी हो सकता है कि स्वयं भी उड़ा रहा हो। इससे पहले कांग्रेस ने भी अमित शाह के सभास्थल की परमिशन पर भी सवाल उठाए थे और परमिशन निरस्त करने की मांग की थी।

मजदूर बोले ठेकेदार, ठेकेदार बोले पीडब्ल्यूडी भरवा रही गड्ढे
हमारी टीम द्वारा जब सड़कों पर गड्ढों में डामर भर रहे मजदूरों से पूछा कि यह डामर किसके द्वारा डलवाया जा रहा है तो मजदूरों का कहना था कि ओशोसिएट फर्म द्वारा डलवाई जा रही है, जब फर्म के मालिक दिनेश गेंड़ा से बात की गई तो उनका कहना था कि सड़क मेरे द्वारा नहीं, बल्कि पीडब्ल्यूडी द्वारा डलवाई जा रही है। कुल मिलाकर आचार संहिता की तो धज्जियां उड़ ही रही हैं ना।
बिना परमिशन के भाजपाइयों ने किए स्वागत के इंतजाम
आचार संहिता का उल्लंघन करने में भाजपाई भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और छोड़े भी क्यों सत्ता में जो हैं? काली माता मंदिर से लेकर झांसी तिराहे तक स्वागत के बैनरों के लिए पाइप लगा दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो कई स्थानों पर स्वागत में राष्ट्रीय अध्यक्ष को तौलने की भी तैयारी है। जबकि इस तरह के कार्यों के लिए प्रशासन से परमिशन की आवश्यकता होती है।
इनका कहना है
मेरे द्वारा टेंट या बैनर लगाने की कोई परमिशन नहीं दी है और न ही मेरे पास कोई आया है।
प्रदीप तोमर, एसडीएम शिवपुरी






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