
अजेय राज सक्सेना, शिवपुरी। आज हम बात कर रहे है शिवपुरी जिले की कोलारस विधानसभा की जिस विधानसभा ने कुछ दिन पूर्व उपचुनाव में मध्यप्रदेश के घोषणा वीर को महाराज ने पटकनी दी थी। इस विधानसभा में इस बार भी बीजेपी में टिकट को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है और जंग को युद्ध स्तर तक पहुंच चुकी है। अब दो दिन पीछे चलते है भोपाल से सूचना आ रही थी की छमाही का टिकट फाइनल हो रहा है। तभी पत्ते वालो की नींद आखों से गायब हो गयी और तत्काल तैयारी की गई भोपाल कूच की। सेना भी साथ गयी लगभग 20 गाडिय़ों से कूच किया गया। राजा साहब नहीं मिलने के मूड में थे, लेकिन पत्ते वाले भी पूरे पत्ते बिछा कर आये थे तो मजबूरन सुबह राजा साहब को मिलना पड़ा और पत्ते वाले वाले तो दो टूक कहा भी की दलबदलू नहीं चलेगा और सेना भी यही बोली यानी कार्यकर्ता मतलब अब फिर रेड लाइट चालू छमाही के लिए। फिर पत्ते वाले बोले राजा साहब जब दलबदलू को ही पार्टी में तरहीज दी जाएगी तो फिर हम भी दलबदलू बनने को तैयार है वो भी पूरी सेना के साथ, राजा साहब का माथा ठनका और फिर कुछ गुप्तगू हुई और पत्ते वाले संतुष्ट भाव के साथ बाहर आये तभी छमाही को सूचना मिली गुप्तचरों द्वारा कि टिकट पर फिर तलवार लटक गई है , तो जे भी पहुंचे राजा साहब के दरबार और फिर अर्जी लगाई कि साहब अब तो सुन लो हमारी एकबार आप ने मौका पत्ते वालों को दिया है फिर मुझे क्यों नही मिलना चाहिए मौका। फिर शिवपुरी की देवी जी की एनओसी भी इस सीट पर जरूरी है, नहीं तो राजा साहब की गद्दी डोलने लगेगी, ये तो राजा साहब को भी इल्म है फिर इस सीट ने पहले तो सिर्फ संभावित की नींद उड़ाई थी अब तो राजा साहब को भी कोलारस की वजह से नींद की गोली खानी पड़ रही है। भाजपा के लिए यह सीट पर टिकट फाइनल करना गले की हड्डी बन कर रह गया है ना तो उगलते बन रही है और ना ही निगलते। अब अगर इस समस्या से निकलना है तो राजा साहब को एक ही रास्ता नजर आ रहा है के इस लड़ाई में ना तो छमाही को टिकट मिलेगा जबकि पत्ते वाले तो छमाही के खातिर टिकट सरेंडर करने को तैयार है और किसी भी अन्य नाम पर हामी भरने को तैयार है बस वो भाजपा का मूल कार्यकर्ता होना चाहिए, मूल रूप से भाजपा से जुड़ा हुआ चाहिए।






Be First to Comment