
एसएएफ जवानों ने बिना सरकारी सहयोग के शुरू की पहल हरियाली से आच्छादित है बटालियन परिसर
शिवपुरी। तेजी से घट रही पेड़ों की संख्या और उसके दुष्प्रभाव पर चिंतन तो अक्सर लोग करते हैं, लेकिन उनसे सबक नहीं लेते। पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो पर्यावरण के लिए सरकारी मदद का इंतजार नहीं करते, बल्कि खुद इस दिशा में पहल करके इसे अभियान का रूप दे देते हैं। ऐसा ही कुछ शहर के नजदीक हाईवे पर स्थित एसएएफ की 18 वीं बटालियन में देखा जा सकता है, जहां चार साल पहले एसएएफ के एक एसआई को दोस्त की नसीहत ऐसी दिल पर लगी कि उसने बटालियन के अन्य अधीनस्थों व अधिकारियों के साथ मिलकर पेड़ लगाने की मुहिम ही छेड़ दी। दरअसल एसआई विजय शर्मा का दोस्त बटालियन पहुंचा था और उसकी गाड़ी उसे पेड़ न होने के कारण धूप में खड़ी करनी पड़ी जिस पर दोस्त ने एसआई विजय शर्मा को सलाह दी कि इतनी बड़ी जगह है पेड़ लगाओ तो यह हालात नहीं बनेंगे। बस इसके बाद पेड़ लगाने का अभियान शुरू हुआ। कुछ महीनों तक पेड़ों को टेंकरों से पानी के जरिये सींचा गया। जब फोरलेन का निर्माण शुरू हुआ तो बटालियन के समीप ही मुरम उत्खनन से बड़ा तालाब जैसा स्थान बन गया। जिसमें बटालियन व आसपास का पानी डिस्चार्ज करने की मुहिम बटालियन के लोगों ने शुरू की। आज इस तालाबनुमा गड्ढे में 40-50 फिट पानी रहता है। इस पानी के परिणाम बटालियन में हरे भरे पेड़ों के रूप में साफ नजर आता है।
30 पौधों से की शुरूआत, सहयोग मिला तो आज हरिया रहे सैंकड़ों पेड़
करीब चार वर्ष पूर्व एसआई विजय शर्मा ने अप्रैल माह की भीषण गर्मी में बटालियन में 30 पौधे लगाकर शुरूआत की। विजय को अपने साथियों एवं अधिकारियों का सहयोग मिला तो आज यह पौधे पेड़ बनकर सैंकड़ों की संख्या में बटालियन परिसर में हरियाली बिखेर रहे हैं। इसका श्रेय विजय शर्मा ने अपने कमांडेंट एवं जवानों को दिया है क्योंकि उनके सहयोग के बिना यह सबकुछ नहीं हो पाता।
पानी के संकट से निटपने के लिए बनाया तालाब
विजय शर्मा ने बताया कि हमने पौधे तो लगा दिए, लेकिन गर्मी के दिनों में इनमें पानी देना काफी मुश्किल होता था। गर्मी के दिनों में तीन-चार महीने प्रतिदिन 10 से 15 टेंकर बाजार से मंगवाने पड़ते थे। ऐसे हालात में किस्मत से फोरलाइन की खुदाई के दौरान बटालियन के पास में एक गड्ढा बन गया जिसमें 10-15 फिट पानी भर जाता था जो नाकाफी था। तभी हमने श्रमदान करके इस गड्ढे में आसपास के नालों को डायवर्ट कर दिया। जिससे यह पूरी तरह भरने लगा। आज स्थिति यह है कि गर्मी के मौसम में 40 से 50 फिट साफ नीला पानी भरा हुआ है।
एक जवान हमेशा रहता है तैनात
चूंकि पानी की गहराई एवं भराव अधिक है इसलिए बाहरी लोगों के यहां पर आने से दुर्घटना का भी अंदेशा बना रहता है इसलिए यहां हमेशा एक जवान तैनात रहता है। जवान के यहां तैनात रहने से यहां पर कोई गंदगी भी नहीं फैला पाता है।
गांव के बोर हो रीचार्ज
18 वीं बटालियन के आसपास आने वाले चंदनपुरा, बिनेगा सहित अन्य गांव के बोर पहले गर्मियों में सूख जाते थे, लेकिन आज इस तालाब के भरे होने से यह बोर भी रीचार्ज हो रहे हैं जिससे गर्मियों में यह सूखते नहीं, बल्कि अब पूरे वर्ष भर पानी देते हैं।
शासन का सहयोग मिला तो शहरवासी भी हो सकते हैं लाभान्वित
यहां गौर करने वाली बात यह है कि वर्तमान स्थिति में शिवपुरी शहर में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है ऐसी स्थिति में 18 वी बटालियन के पास छोटे तालाब में 40 से 50 फिट पानी भरा हुआ है। यह सब एसएएफ जवानों की मेहनत कर परिणाम है जिसमें शासन से कोई सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। यदि शासन द्वारा इस ओर कोई प्रयास किए जाएं तो हो सकता है यह तालाब शहरवासियों के लिए भी काम आ सके।
इनका कहना हैं
मुझे पेड़ पौधे लगाने में बचपन से ही दिलचस्पी थी। मेरे मित्र की गाड़ी धूप में खड़ी होने के बाद से मैंने पौधे लगाने का संकल्प लिया। इसमें कमांडेंट साहब का भरपूर सहयोग मिला। हमारे जवानों ने श्रमदान करके आज एक छोटा सा तालाब बना दिया है। इसमें भी कमांडेंट साहब जो विगत दिनों शिवन एसपी बनकर चले गए हैं का भी भरपूर सहयोग मिला।
विजय शर्मा
एसआई, एसएएफ 18 वीं बटालियन






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