
घायल टिंकल ने बताया हाथ और मुंह रेत में नहीं दबे होते तो नहीं बच पाती जान
शिवपुरी। कल बैराड़ तहसील के मारोरा खालसा गांव में मिट्टी की खदान धंसकने से चार लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन दो लोगों को जिंदा बचा लिया गया था। खदान दुर्घटना में जिन दो लोगों की जान बची उनके नाम अभिषेक और टिंकल हैं। वह भी खदान धंसकने से उसमें दब गए थे, लेकिन ईश्वरीय कृपा से दोनों घायलों के हाथ और मुंह रेत में नहीं दबे थे। संयोग से उसी समय सरपंच पुत्र ऊदल धाकड़ बाइक से बैराड़ आ रहा था और उसकी नजर जब खदान पर पड़ी तो उसे बच्चों के हाथ बाहर निकले दिखाई दिए। इसके बाद ऊदल ने पहले टिंकल और फिर अभिषेक को बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने फाबड़ों से मिट्टी हटाना शुरू की, लेकिन मृतक काफी गहरे दब गए थे और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्वती नदी के पास रेत के टीले से जब कुछ लोग रेत निकाल रहे थे तो वह रेत निकालते निकालते काफी भीतर पहुंच गए थे। बारिश से टीले में नमी आ गई थी तथा वहां कमरानुमा बन गया था जिसमें काफी ठंडक थी और ठंडक के कारण वह रेत खोदते खोदते काफी भीतर पहुंच गए थे। गर्मी में जब नदी सूख जाती है तो रेत का उत्खनन बड़े पैमाने पर होता है। रेत निकाल रहे इन युवकों को ग्रामीणों ने रोका भी था और आशंका व्यक्त की थी कि टीला धंसक सकता है, लेकिन वे नहीं माने और हादसे का शिकार हो गया। मृतकों में सरबन के दो बेटे भी शामिल हैं जिनके नाम श्रीनिवास और सुदामा है। सरबन की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है तथा उसका बीपीएल कार्ड भी है। उसका मकान कच्चा है तथा झोंपड़ीनुमा रसोई है। सरबन के बेटे और अन्य परिजन पक्का किचिन शेड बनाने के लिए रेत खोदने गए थे।
पूर्व में भी हो चुके हैं कई हादसे
जिले में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जाता है । पार्वती नदी पर होने वाले रेत के इस अवैध उत्खनन के बाद यह पहला हादसा नहीं है। बल्कि तीन साल में इस तरह के चार हादसे हो चुके हैं और लगभग एक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन इस तरह के हादसे रोकने के लिए कोई कार्यवाही नहीं कर रहा।
मां ने बच्चों को रेत लाने से रोका था
सरबन के दो पुत्रों की मौत हुई है। सरबन की पत्नि त्रिवेणी ने अपने दो बेटों सुदामा गोस्वामी और निवास गोस्वामी को हमेशा के लिए खो दिया है। बताया जाता है कि त्रिवेणी ने अपने बच्चों को रेत लाने से रोका था और कहा था कि रेत का खनन करने नहीं जाना, लेकिन उसकी बात किसी ने नहीं सुनी।
हादसे में सुदामा ने खो दिए अपने दो बेटे
मारोरा खालसा निवासी सरबन पुरी के पांच बेटे हैं जिनमें से बड़ा बेटा शीतल जयपुर में मजदूरी करता है और दूसरा बेटा सोहन भिण्ड के मालनपुर में किसी फैक्ट्री में काम करता है जबकि तीसरे और चौथे नम्बर के पुत्र निवासपुरी तथा सुदामापुरी की हादसे में मौत हो गई है। निवासपुरी पढऩे में मेधावी छात्र था और उसने बारहवीं की परीक्षा में 91 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे तथा वह आगरा से बीएससी की पढ़ाई कर रहा था। 1 जुलाई को वह आगरा जाने वाला था, लेकिन हादसे का शिकार हो गया। सरबनपुरी के चौथे बेटे सुदामा की मौत हो गई है जबकि पांचवे बेटे टिंकल की जान बच गई है।






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