राष्ट्रपति अवार्ड सहित दो बार सीएम सहित सैंकड़ों अवार्ड प्राप्त पुलिस डिपार्टमेंट कर चुके हैं गौरवान्वित

अजयराज सक्सेना/ केदार सिंह गोलिया, शिवपुरी। प्रदेश सरकार ने शनिवार को 13 जिलों के पुलिस अधीक्षक बदले हैं। सरकार का यह बदलाव आगामी विधानसभा को मद्देनजर माना जा रहे हैं। इसी क्रम में शिवपुरी जिले को एसपी के रूप में सतना एसपी राजेश हिंगणकर मिले हैं, जो 2006 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी। एसपी हिंगणकर को खतरों का खिलवाड़ी और पुरस्कारों का बादशाह कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। श्री हिंगणकर को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। श्री हिंगणकर को इस सम्मान के लिए इंदौर में एसपी-एटीएस रहते सिमी आतंकियों के खिलाफ बड़ी और सफल कार्रवाई के लिए चुना गया था, वहीं उन्होंने एक चर्चित अपहरणकांड में अंडरवल्र्ड के चंगुल में फंसे दो बड़े व्यापारियों को भी छुड़ाया था। अब तक की पुलिस सर्विस में एसपी राजेश हिंगणकर राष्ट्रपति पुरस्कार के अलावा सिंहस्थ अवार्ड, दो बार सीएम अवार्ड, 225 प्रशंसापत्र मिल चुके हैं। जानकारों की मानें तो राष्ट्रपति पुरस्कार पुलिस सेवा में सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। इसे पाकर पुलिस अफसर गौरवान्वित के साथ-साथ बेहतर से बेहतर कार्य की बढ़ी जिम्मेदारी का अहसास कर रहे हैं। शिवपुरी के लिए यह सौभाग्य की बात है कि उन्हें ऐसे काबिल और कर्तव्यनिष्ठ आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक के रूप में मिले हैं। शिवपुरी के लोगों ने तो शायद सिमी और अंडरवल्र्ड जैसे आतंकियों के बारे में सिर्फ सुना ही होगा, लेकिन हमारे नए पुलिस अधीक्षक ने इन्हें अपने कार्यकाल में मुंहतोड़ जबाव दिया है।
अंडरवर्ल्ड से छुड़वाए व्यापारी, पकड़े कई सिमी आतंकी
इंदौर में एडिशनल एसपी रहने के दौरान ही राजेश हिंगणकर ने एक चर्चित अपहरण कांड में व्यापारियों को छुड़वाने में अहम भूमिका निभाई। वहां रुक्मिणी मोटर्स के मालिक कैलाश बाहती और सीमेंट व्यापारी धु्रव माहेश्वरी को अंडरवल्र्ड के आतंकवादियों से छुड़वाया। बताया जाता है कि दोनों व्यापारियों को छोड़ऩे के एवज में पांच-पांच करोड़़ की फिरौती मांगी गई थी, लेकिन दोनों को बगैर एक पैसा दिए छुड़ा लिया गया।
सामाजिक कार्यों में विशेष रूचि
राजेश हिंगणकर एसपी होने के नाते प्रशासनिक के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी विशेष रुचि रखते हैं और अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
जानें एसपी श्री हिंगणकर का अब तक का सफर
20 अक्टूबर 1964 को महाराष्ट्र के अमरावति जिले के सुरजी गांव जन्मे राजेश हिंगणकर ने 1988 में एमपी पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। 1990 से 1992 तक छिंदवाड़ा और सागर में प्रोविजनल डीएसपी के पद पर एक-एक वर्ष रहे। 1992 में 8वीं बटालियन में अस्सिटेंट कमांडेंट के पद पर रहे। 1993 से 95 तक एसडीओपी चित्रकूट रहे। इस दौरान इन्होंने ददुआ डकैत के खिलाफ ऑपरेशन चलाया और गिरोह के दो सदस्यों का एनकांउटर किया। वर्ष 1995 से 2000 तक इंदौर सीएसपी के पद पर रहे। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने नशामुक्ति केन्द्र और सामुदायिक पुलिसिंग के लिए भी उत्कृष्ट कार्य किए। इसी कार्यकाल में उन्होंने तीन अपराधिकयों के एनकाउंटर किए। इंदौर में ही नारकोटिक्स में बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 करोड़ रुपए की स्मैक पकड़ी थी। सिमी के शुरुआती मूवमेंट के खिलाफ भी कार्रवाई की। 2000 से 2001 में भोपाल-दंतेवाड़ा एसडीओपी बनाए गए। इस दौरान उन्होंने नक्सलियों के संघम सदस्य, जिस पर 97 हजार का ईनाम घोषित था, उसका आत्मसमर्पण कराया। 2001 से 2004 तक उज्जैन सीएसपी रहे। इसी कार्यकाल के दौरान 2004 में हुए सिंहस्थ के आयोजन में अच्छे कार्य के लिए सिंहस्थ अवार्ड दिया गया। 2004 से 2006 तक वहां एडीशनल एसपी के पद पर रहे। इस दौरान सिमि के खिलाफ कार्रवाई, अंतराज्यीय गैंग के खिलाफ कार्रवाई की।
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