आगमन स्पंदन संस्था ने दी हैवानियत की शिकार हमारे देश की अबोध नन्ही बेटी ट्विंकल शर्मा को भावांजलि

शिवपुरी-‘ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार, हुई आज हम सब की हार,
हैवानो से देश मे दहशत,
बेटी मरकर करे पुकार,
जल्लादों की जात भी कांपे,
ऐसा मुझ संग किया व्यवहार,
ढाई साल की जान थी मुझ में
सहन न कर पाई संहारÓ यह पंक्तियाँ व्यक्त की कविकार अजय जैन अविराम ने जो स्थानीय आगमन स्पंदन संस्था शिवपुरी के भावांजलि स्वरूप आयोजित हुई काव्य गोष्ठी में भावुक होते हुए सुनाई। बता दें कि गत दिवस महज ढाई वर्ष की मासूम टिंकल के साथ हुई हैवानियत की पराकाष्ठा को ओर दर्शाती है। काव्य गोष्ठी का आरंभ माँ शारदे को धूप बत्ती समर्पित कर आदरणीय राकेश मिश्रा की अध्यक्षता मे हुया। इसके बाद भावों का प्रथम पुष्प कवि शरद गोस्वामी ने समर्पित करते हुये कहा कि ऐसी घटनाएं देश को घृणा और नफरत की आग मे धकेलती है उन्होंने अपने काव्य पाठ मे सुनाया-
‘ गौ गंगा और गीता का यह देश
मर्यादा पुरुषोत्तम माता सीता का यह देश
तोड़ दिया नन्हे सपनों का एक घरौंदा किसनें
गुलशन की नन्ही कलियों को रौंधा किसनेंÓ
अगले क्रम मे गोष्ठी मे अतिथि के रूप मे पधारे समाजसेवी कलमकार महेंद्र रावत ने अपने विचार रखते हये कहा कि इस घटना की पिशाचता बहुत भयानक और अकल्पनीय है लेकिन चिंता का विषय ये की इस तरह की वीभत्स घटना के विरोध में हम पूर्णरूप से खड़े नही हो पा रहे है। हम स्वार्थी और संवेदना शून्य होते जा रहे है। अगले क्रम मे अध्यक्षता कर रहे राकेश मिश्रा के भी इस दर्दनाक घटना को बेहद निंदनीय बताते हुये अपने काव्य पाठ मे सुनाया-
सन्नाटे से सहमे रिश्ते, गूंगे बहरे नाते हैं।
सूरज के हर शंखनाद में, अंधियारे बतयाते हैं।
बाहर सब एकीकृत लगते, अंदर फूट फुटेले हैं।
अंत मे संचालन कर रहे कवि अजय जैन अविराम् ने कहा कि ये घटनाये हमारे खण्ड खण्ड और गैर जिम्मेदार रवैये का परिणाम है आपने काव्य मे अपने व्यथा को व्यक्त करते हुये सुनाया-
जिसका मरा बस वही रो रहा है, बेखबर नशा कर जहाँ सो रहा है
मुझे क्या जरूरत मेरा कौन है वो, यही भाव अब तो कहर दे रहा है
संवेदनाओं की बस यूँ मौत होना, हर एक जहन मे जहर बो रहा है।
अंत मे शरद गोस्वामी ने सभी श्रोताओं और कवियों का आभार प्रगट किया।






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