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अपने कार्यकाल में पुलिस प्रशासन पर कोई विशिष्ट छाप नहीं छोड़ पाए निवर्तमान एसपी हिंगणकर | Shivpuri News


उनके कार्यकाल में स्मैक और रेत का अवैध कारोबार तेज गति से बढ़ा, अपराध नियंत्रण में भी नहीं मिली कोई खास सफलता

शिवपुरी। कांग्रेस सरकार आने के बाद यह चर्चा थी कि उस समय की कलेक्टर शिल्पा गुप्ता और एसपी राजेश हिंगणकर की रवानगी शिवपुरी से डल जाएगी। पहले ही लोट में निवर्तमान कलेक्टर शिल्पा गुप्ता की विदाई हो गई। लेकिन एसपी राजेश हिंगणकर जिन्होंने भाजपा शासनकाल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के हैलीकॉप्टर को सुरक्षा प्रदान नहीं की थी, वह बच निकले। बहुत जल्द ही एसपी हिंगणकर के स्थानीय कांग्रेस नेताओं से अच्छे संबंध बन गए। जिसका परिणाम यह हुआ कि आईपीएस अधिकारी हिंगणकर शिवपुरी एसपी के रूप में पदस्थ रहे। जबकि पुलिस अधीक्षक के रूप में उनका कार्यकाल ऐसा नहीं था जिसे याद रखा जाए। 
याद रखा भी जाता तो यह कि उनके कार्यकाल में स्मैक कारोबार ने जमकर पैर पसारे, रेत का अवैध उत्खनन धडल्ले से हुआ और जिले के विभिन्न थानों की पुलिस जनता के प्रति असंवेदनशील व्यवहार के कारण चर्चित रही। मीडिया के साथ भी पुलिस का खासा दुर्भाव देखने को मिला। दो पत्रकारों के विरूद्ध आनन-फानन में बिना किसी जांच के आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिए गए और एक मामले में तो अपराध दर्ज होने के साथ ही पत्रकार की गिरफ्तारी भी कर ली गई। लेकिन लोकसभा चुनाव में शिवपुरी जिले से कांग्रेस की शर्मनाक पराजय की गाज अंतत: पुलिस अधीक्षक हिंगणकर पर गिरी और उनकी शिवपुरी से विदाई हो गई। उनका स्थान विधानसभा चुनाव के बाद सीहोर से हटाए गए एसपी राजेश सिंह लेंगे। निवर्तमान एसपी सुनील पांडेय की विदाई के बाद जब शिवपुरी पुलिस अधीक्षक के रूप में राजेश हिंगणकर पदस्थापना हुई तो उनके समक्ष चुनौतियों का अंबार था। श्री पांडेय एक भले और सज्जन अधिकारी हैं। उन पर भ्रष्टाचार का भी कोई आरोप नहीं है। लेकिन सज्जनता उनके प्रशासन में आड़े आई और उनके कार्यकाल में पुलिस प्रशासन निष्क्रियता से नहीं उभर पाया। इसलिए जब एसपी राजेश हिंगणकर शिवपुरी आए तो स्थानीय निवासियों को उनसे आशा थी कि वह एक ओर जहां शिवपुरी को अपराधों से मुक्त बनाएंगे। वहीं पुलिस की एक ऐसी छवि पेश करेंगे, जिससे जनता और पुलिस के बीच रिश्ते सोहाद्रपूर्ण बने। एसपी हिंगणकर ने अपनी पहली पत्रकारवार्ता में संकेत भी दिया था कि वह जनता से नजदीकियां बढ़ाएंगे और थानों में ऐसे अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की पदस्थापना की जाएगी जो भलोंं के साथ भला और बुरों के साथ बुरा व्यवहार करेंगे। आम जनता को परेशान नहीं किया जाएगा और अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। रेत के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने का एसपी ने प्रयास किया और कटेंगरा तथा कल्याणपुर खदानों पर छापे की ताबडतोड़ कार्यवाईयों को अंजाम दिया। लेकिन उसके बाद पुलिस प्रशासन में यथा स्थिति बाद से एसपी हिंगणकर उभर नहीं पाए। थानों में टीआई, थाना प्रभारियों और स्टाफ की उनके द्वारा की गई नियुक्ति हमेशा विवादों में रही। जिला मुख्यालय और शहरी क्षेत्र में ऐसे उम्रदराज थाना प्रभारियों की नियुक्तियां की गई, जिनकी अपराधों के नियंत्रण में कोई रूचि नहंीं थी। उनके कार्यकाल में अधिकांश थाने भ्रष्टाचार के अड्डे बन गए। खुलेआम रेत का अवैध कारोबार शुरू हो गया। जिस पर पुलिस प्रशासन द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। पिछले एक डेढ़ साल में शिवपुरी में स्मैक कारोबार ने बुरी तरह पैर पसार लिए और छोटे-छोटे बच्चे तक इस नशे का सेवन करने लगे। जिसकी रोकथाम के कोई प्रयास नहीं किए गए। उनके कार्यकाल में पुलिस का पूरा ध्यान अवैध शराब की धरपकड़, छोटे-छोटे जुआरियों की पकड़ा धकड़ी और वारंटियों की गिरफ्तारी तक सीमित रही। मजे की बात तो यह है कि वारंटी जब पकड़ा जाता है और अवैध शराब जब बरामद की जाती है तो पुलिस के हर प्रेस नोट में इसका जिक्र होता है कि इसकी जानकारी एसपी हिंगणकर को लगी और जरा-जरा सी कार्रवाई में पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के नाम डालकर महिमा मंडन करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाता। राजनेताओं से तालमेल बनाने में अवश्य पुलिस प्रशासन का अहम योगदान रहा। सत्ताधारी दल के छोटे-छोटे नेताओं को तबज्जो मिलती रही। पुलिस के कार्यक्रम में उन्हें अतिथि और मुख्य अतिथि बनाया जाता रहा। लेकिन अंतत: एसपी राजेश हिंगणकर की शिवपुरी से विदाई हो गई। ं

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