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कलियुग में कल्याण व भगवत चरणों को प्राप्त करने का साधन एक भाव हरि नाम है : कल्याणचंद्र-shivpuri news

श्रीमदद्भागवत कथा में सुनाया कृष्ण जन्म का वृत्तांत 
शिवपुरी। शहर के पीएस होटल के पीछे भागवत कथा का आयोजन किया गया जा रहा है। कथा में आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान नंद के आनंद भयो से पूरा परिसर गूंजने लगा। महिलाएं अपने स्थान पर खड़ी होकर झूमने-नाचने लगीं। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की वेश में नन्हें बालक के दर्शन करने लोग लालायित रहे। कथा वाचक कल्याणचंद्र ने कहा कि पापी कंस के अत्याचार को समाप्त करने के लिए भगवान ने जैसे ही देवकी के आठवें गर्भ से जन्म लिया और कंस का संहार का धर्म की रक्षा की। 

उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन अच्छे कर्मों के लिए मिला है इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करो। कभी भी दूसरों को बिना वजह परेशान मत करो। उन्होंने कहा कि कलियुग में कल्याण व भगवत चरणों को प्राप्त करने का साधन एक भाव हरि नाम है। हमें भगवान से भक्ति के अतिरिक्त और कुछ नहीं मांगना चाहिए।
कल्याणचंद्र ने श्रीकृष्ण जन्म का वृत्तांत सुनाते हुए कहा कि कंस एक सामाजिक बुराई है। बुराई के हमेशा दो रूप होते हैं। एक असली और दूसरा नकली। कंस जिस समय देवकी वसुदेव का रथ हांकने लगा तो भगवान ने आकाशवाणी के जरिए देवकी व वसुदेव को सचेत किया कि जो कंस तुम्हारी दृष्टि में सुधरा हुआ दिखाई दे रहा है वह बुराई का नकली रूप है। जब वही कंस देवकी के केश पकड़ कर रथ से घसीटने लगा और मारने के लिए उठा तो यह बुराई का दूसरा स्वरूप है।साथ ही जो दूसरों को सुख देने में ही पूरा जीवन लगा देता है, वही धरती का भगवान है। अपने बेटे-बेटियों को पालना-सना ही जीवन नहीं है। यह कार्य तो पशु-पक्षी भी कर लेते हैं। हमारा दायित्व बनता है कि हम उन्हें अच्छे संस्कार दें।
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