शिवपुरी। जिला अस्पताल में पौने चार साल के एक मासूम की आंख की जटिल सर्जरी शनिवार को सफलता पूर्वक पूरी कर ली गई। जाने माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ9 गिरीश चतुर्वेदी ने यह जटिल सर्जरी अपनी योग्यता और निपुणता के साथ मासूम को दादा दादी की कहानी सुनाकर उस खास अंदाज में पूरी की, जिसे सुनकर कोई भी रोमांचित हो सकता है।
दरअसल साइकिल का ब्रेक आंख में लगने से 4 वर्षीय मासूम संगम पुत्र हरनाम कोली निवासी ग्राम पिपराए पिछोर की आंख जख्मी हो गई थीए उसे इतनी गहरी चोट आई थी कि उसकी आंसू की नस कट गई थी। आंख बुरी तरह से जख्मी हो गई थी। 6 घंटे के अंदर डेढ़ घंटे के ऑपरेशन की जरूरत थी, वरना आंख खराब हो सकती थी। दूसरी तरफ डेढ़ घंटे बेहोश करने पर मासूम की जान को खतरा था। इसे ध्यान में रखते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने एनेस्थीसिया के डॉ. सीपी गोयल से परामर्श किया। जब दोनों एक राय हुए तो बेहोश करने की बजाय आंख सुन्ना करने का फैसला लियाए लेकिन मासूम बालक सहयोग कर पाएगा, इसमें संदेह को देखते हुए डॉक्टर चतुर्वेदी ने उससे पहले दोस्ती की। न सिर्फ मासूम को टॉफी खिलाई, बल्कि कहानी सुनाते हुए उसे ऑपरेशन में सहयोग के लिए राजी कर लिया। आंख के हिस्से को सुन्ना कर सर्जरी शुरू की। डॉ. चतुर्वेदी कहते हैं कि सर्जरी करते उन्हें आधा घंटा ही हुआ था कि मासूम को बेचैनी होने लगी। यह देखकर उन्हें लगा कि परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए मासूम को वे ओटी से बाहर ले गए। फिर उसे कहानी सुनाई और यह भी कहा कि ऑपरेशन कितना जरूरी है। अगर ऐसा न किया तो परेशानी बढ़ जाएगी। उम्र छोटी होने के बावजूद उस मासूम ने जब डॉ. चतुर्वेदी को ऑपरेशन की स्वीकारोक्ति दे दी तो दोबारा से ऑपरेशन शुरू किया गया। इस दौरान डॉ. चतुर्वेदी ने मासूम को न सिर्फ परियों की कहानी सुनाईए बल्कि दादा.दादी के किस्से भी सुनाते रहे। नतीजा यह हुआ कि डेढ़ घंटा कब पूरा हो गया पता ही नहीं चला। इधर ऑपरेशन सफल हो चुका था। तब डॉक्टर ने राहत की सांस ली और भगवान का शुक्रिया अदा किया। इस तरह एक मासूम की बुरी तरह जख्मी आंख को डॉक्टर ने न सिर्फ कुशल चिकित्सा ज्ञान के सहारे बल्कि मानवीय तरीके का इस्तेमाल करते हुए सही कर दिया।






Be First to Comment