शिवपुरी। वर्ष 2017 में जिला अस्पताल में हुए रेडियेंट वार्मरों की खरीद में गड़बड़ी सामने आने पर मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी एएल शर्मा ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच की बात कही है। यह खरीदी पूर्व सीएमएचओ के कार्यकाल में हुई थी। इस दौरान उन पर अस्पताल के सिविल सर्जन का भी प्रभार था। यह खुलासा एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा हासिल किए गए दस्तावेजों में हुआ है। जिस पर सीएमएचओ ने मामले को संज्ञान में लिया है।
नवजात शिशुओं के लिए 20 रेडियेंट वार्मरों की खरीद का दिया था ऑर्डर
आरटीआई एक्टिविस्ट भूपेंद्र शर्मा से मिले दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि 23 दिसम्बर 2017 को जिला अस्पताल में एनएचएम मद से ऑनलाइन गर्वमेंट ई मार्केटिंग से 20 रेडियेंट वार्मरों की खरीद का आदेश दिया था, लेकिन बाद में यह आदेश निरस्त कर दिया और निर्धारित दर से 6 हजार रूपए अधिक के हिसाब से रेडियेंट वार्मरों की खरीद की गई। इस तरह नवजात बच्चों के लिए हुई रेडियेंट वार्मरों की खरीदी में हुई गड़बड़ी गंभीर जांच का विषय बन गई।
पूर्व सीएमएचओ कई विवादों में बटोर चुके हैं सुर्खियां
अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ बनाए गए डॉ. सगर शिवपुरी में सीएमएचओ भी रह चुके हैं। जिनका कार्यकाल काफी विवादों में रहा। इससे पहले वह ग्वालियर, श्योपुर और पन्ना जिले में भी रह चुके हैं जहां पन्ना में अधिकृत रूप से गैर हाजिर रहने और कई शिकायतों व आरोपों के चलते वह कार्यवाही का दंश झेल चुके हैं। ग्वालियर के मुरार अस्पताल में भी डॉ. गुर्जर के साथ हुए विवाद में भी वह निलंबित हो चुके हैं। इस तरह उनका पूरा कार्यकाल विवादों में रहा है। आरटीआई स्पेशलिस्ट ने शिवपुरी में उनके कार्यकाल में हुई गड़बडिय़ों की जांच की मांग की है।





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