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रेंजर अनुराग तिवारी पर चार-चार रेंजों का प्रभार से अवैध कार्यों को मिला बल | Shivpuri News

 
नियमित मॉनीटरिंग के अभाव में फलफूल रहे अवैध कार्य

शिवपुरी। प्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार आई है तब से सिर्फ और सिर्फ आपाधापी का माहौल निर्मित है बात करे बन मण्डल शिवपुरी की तो यहां जो हालात है वो किसी से छुपे नही है महीनों समाचार पत्रों की शोभा बढाता हुआ बन महकमा शिबपुरी हमेशा अब्बल दर्जे पर ही रहा है चाहे बात अबैध रेत उत्खनन की हो या अपनों को पुरस्कृत करने की हमेशा ही बन मण्डल शिवपुरी का एक तरफा दबंगई वाला माहौल ही रहा है। बात करें रेंजर अनुराग तिवारी पर चार चार जगह का प्रभार होने से रेंजों में प्रोपर मोनिटरिंग न होने से अबैध उत्खनन जैसे मामलो को बल मिला है। बन महकमा शिबपुरी की कार्यप्रणाली पर अगर नजर दौड़ाए तो एक चिंतन करने वाला पहलू निकल कर आता है बन बिभाग शिबपुरी जिले में एक रेंजर अनुराग तिवारी आजकल हनुमान जी की भूमिका अदा कर रहे है जिन पर इतनी शक्तियां है कि वो चाहे तो पूरे जिले का बन बिभाग अकेले चलाने की क्षमता रखते है इसीलिए बन बिभाग के मुखिया ने उन्हें चार चार रेंजों का मुखिया बना के रखा है जबकि शासन के नियमानुसार रक रेंजर के पास एक ही रेंज होनी चाहिए जिससे वो पूरी रेंज क्षेत्र में हो रही अबैध गतिविधियों पर शिकंजा कस सके लेकिन ऐसा न होना समझ से परे है सरकार को भी इस पर बिचार करना चाहिए और पूरे प्रदेश में ऐसे रेंजरों को चिन्हित कर बिशेष ट्रेनिंग देकर 20 रेज का मुखिया बनाने का नियम निकालकर नियुक्ति कर देना चाहिए जिससे कि शासन के खजाने में से जा रही अन्य पदस्थ रेंजरों की तनखा और भत्ते  बचाये जा सके। एक रेंजर को चार चार जगह का मुखिया बनाना कहि न कही अबैध उत्खनन जैसी गतिविधियों को बढ़ाबा देकर लक्ष्मी प्राप्ति का स्रोत मजबूत करना है। एक रेंजर द्वारा चार चार रेंजों का प्रभार देना कही न कही बड़े भरस्टाचार को जन्म देता है एक रेंजर को इतनी जिम्मेदारी देना स्वभाबिक है कि सिर्फ और सिर्फ अबैध प्रतिक्रियाएं संचालन हो सके इसीलिए प्रभार देने की प्रक्रिया की गई होगी। 

शिवपुरी को छोड़कर अन्य जिलों में डिप्टी रेंजरों को दिया गया है प्रभार

शिबपुरी जिले को छोड़कर अन्य जिलों में जिन रेंजों पर रेंजर नही है उन रेंजों पर डिप्टी रेंजर को चार्ज दिया गया है जिससे कि बेहतर रूप से संचालन हो सके और अबैध उत्खनन और अन्य अबैध गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके लेकिन शिबपुरी जिले में ऐसी स्थिति नही है यहां एक रेंजर को चार चार जगह का प्रभार दिया गया है ऐसा नही है कि वहा डिप्टी रेंजर नही है जिस जिस जगह का प्रभार रेंजर अनुराग तिवारी पर है उन रेंजों में डिप्टी रेंजर है लेकिन उन लोगो को जिम्मेदारी बन मण्डल द्वारा नही दी जा रही एक रेंजर पर चार जगह का चार्ज होने से प्रोपर मोनिटरिंग नही हो सकती और इसी कारण राजापुर सोनचिरैया सतंनबाड़ा जैसे क्षेत्रों में अबैध उत्खनन में सुनामी सी आ गयी है कही कोई धनी डोरी नही है जिम्मेदार व्यक्ति के न होने से अबैध गतिविधिया बढ़ गयी है।

सीसीएफ शिबपुरी ने मामले को बताया नियमानुसार

इस पूरे मामले पर सी सी एफ महोदय शिबपुरी से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि रेंजर न होने से ऐसा किया गया है जब उनसे कहा गया कि अन्य जिलों में भी रेंजर नही है लेकिन वहां कार्य प्रभावित न हो इसलिये डिप्टी रेंजरों को चार्ज दिया गया है तो उन्होंने कहा कि वो नियम विरुद्ध है फिर भी हम कोशिश करेंगे अन्य जिलों जैसा करने की जिससे सही मोनिटरिंग हो सके । अब आपको बता दे कि सी सी एफ शिबपुरी पर शिवपुरी जिले को छोड़कर गुना अशोकनगर आदि जिलों का चार्ज है लेकिन गुना अशोनागर और पूरे प्रदेश के जिलों में रेंजर की कमी के चलते डिप्टी रेजरों को प्रभारी बनाया गया है लेकिन शिबपुरी में इन्ही सी सी एफ द्वारा एक रेंजर को करैरा, सोनचिरैया,पिछोर,कोलारस का अतिरिक्त प्रभार देकर एक मिशाल कायम की गई जबकि इन्ही सी सी एफ द्वारा अन्य जिलों में डिप्टी रेंजरों को प्रभार दिया है ऐसे में एक रेंजर के प्रति नियमो को स्थिल कर लाभ देना समझ से परे है। 

डी एफ ओ ने भी झाड़ा पल्ला गेंद दूसरे पाले में फेंककर अपने कर्तब्यों से इतिश्री की

इस मामले में जब डी एफ ओ शिबपुरी से जानकारी ली तो उन्होंने स्पष्ट शब्दो मे दो टूक कहा दिया कि रेंजरों को प्रभार देने का और हटाने का अधिकार सी सी एफ महोदय के  पास ही रहता है हम तो उनके आदेश का पालन करते है।
शिबपुरी जिले के बन महकमे में दो एस डी ओ पदस्थ है गर्मी के माहौल में दोनों का क्षेत्र में निकलना हुआ मुश्किल। एस डी ओ के प्रोपर मोनिटरिंग न होने से सतनबाड़ा और राजापुर जैसी खदानों पर अबैध उत्खनन में भयंकर सुनामी सी आ गयी है शिवपूरी कार्यालय से ही होती है पूरे जिले की मॉनिटरिंग गर्मी ज्यादा होने की बजह से ऑफीस से बाहर निकलना होता है मुश्किल जब सब कुछ ऑफिस से ही हो जाये तो बाहर क्यों निकला जाए। अपना तो यही कहना है कि बिभाग में सभी जिम्मेदार होते है अपने निजी हित और निज स्वार्थ के लिए नियमो को दरकिनार न करे बिभाग के मुखिया के लिए सभी एक समान होते है और पने ही घर मे सेकड़ो बिभीषण जन्म ले लेते है।
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