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क्रांतिवीर सावरकर क्रांति की यूनिवर्सिटी थे : गौतम | Shivpuri News

शिवपुरी। समूची दुनिया के के इतिहास में हमने कई सारे क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ा है किंतु विनायक दामोदर सावरकर असल मायनों में क्रांति की यूनिवर्सिटी थे, लंदन स्थित “इंडिया हाउस” के जरिये उन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए सैकड़ों क्रांतिकारियों की पौध तैयार की जिन्होंने भारत की आजादी अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। वहीं वीर सावरकर दुनिया के इतिहास में सर्वाधिक यातना भोगने वाले क्रांतिकारी थे। वे इकलौते क्रांतिकारी थे जिन्हें दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
   
उक्त बातें एडवोकेट अजय गौतम “एडवोकेट” ने जनजागरण मंच द्वारा आयोजित विनायक दामोदर सावरकर की 136 वी जयंती के अवसर पर स्थानीय सावरकर पार्क में आयोजित जयंती सभा को संबोधित करते हुए कही। श्री गौतम ने कहा कि वीर सावरकर भारतीय क्रांति के अग्रदूत थे युवाओं को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेना चाहिए और भारत की सुरक्षा और विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। कवि आशुतोष ने कहा कि वीर सावरकर द्वारा लिखी

गई किताब “भारत किन्तु प्रथम स्वाधीनता समर” सभी नौजवानों को पढ़नी चाहिये। जयंती कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत मत्स्य अधिकारी महेन्द्र दुबे, मंच के सचिव जगदीश खण्डेलवाल, मंच के उपाध्यक्ष यशवंत जैन एवं पूर्व पार्षद राजेन्द्र गुर्जर ने दीप प्रज्वलन कर की। सभी ने माल्यार्पण किया एवं सभी युवाओं ने वीर सावरकर को पुष्पांजलि अर्पित की। पार्क में वीर सावरकर की प्रतिमा की स्थापना का विचार किया गया। आभार प्रदर्शन यशवंत जैन ने किया।
       
इस अवसर पर वीर सावरकर पार्क बालभवन के युवा छात्र-छत्रायें, समाजसेवी एवं पार्क में उपस्थित अन्य कई व्यक्ति उपस्थित थे।

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