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सिर्फ नाम का अस्पताल, फैक्चर के लिए बाहर से खरीदकर ला रहे प्लास्टर, एक्सरे के लिए भी करना पड़ रहा घंटों इंतजार, स्ट्रचर भी उपलब्ध नहीं / Shivpuri News

शिवपुरी। जिला अस्पताल की व्यवस्थाएे लगातार बिगड़ती जा रही हैं। यहां मरीज को डॉक्टर मिल जाता है तो इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती। वहीं इलाज की सुविधा मिलती है तो डॉक्टर इलाज करने नहीं पहुंच पाते। इतना ही नहीं अस्पताल में एक्सरे कराने आए मरीजों को फिल्म नहीं मिल पाती तो कई बार मरीजों को एक्सरे के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं सामान्य व्यस्था जैसे स्ट्रेचर, मरीजों के लिए पलंग तक जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो पाते। कुल मिलाकर अस्पताल की व्यवस्थाएं चाराें खाने चित हो गई है।

प्लास्टर के लिए बाहर से ला रहे सामान

जिला अस्पताल के आॅर्थो वार्ड में मरीजाें को प्लास्टर बांधने के लिए सामान बाजार लाना पड़ रहा है। मेडिकल वार्ड में ताे हालात यह हैं कि 140 से अधिक मरीजों के लिए सिर्फ 48 पलंग हैं। गैलरी में मरीजों को फटे गद्दों पर भर्ती रखकर इलाज किया जा रहा है। कई मरीजों को फटे गद्दे तक नसीब नहीं हो पा रहे।

अस्पताल व मेडीकल कॉलेज के डॉक्टरों के बीच नहीं हो पा रहा समन्वय
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों सहित स्टाफ के बीच समन्वय न होने से हालात बदतर हो गए हैं। ऐसे बेहतर इलाज की आस में भर्ती हो रहे मरीजों की फजीहत हो रही है। दरअसल जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काॅलेज के डॉक्टर व स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है लेकिन मरीज के इलाज से लेकर सुविधाओं की सुध लेने कोई आगे नहीं आ रहा। मेडिकल कॉलेज परिसर में बनकर तैयार 300 बिस्तर का नया अस्पताल जब तक चालू नहीं हो जाता, तब तक जिला अस्पताल में मरीज इलाज को ऐसे ही तरसते रहेंगे।

घायलों को समय से नहीं मिल पाता उपचार

जिले में अगर कोई घटना घटित होती है और घायलों को यदि जिला अस्पताल लाया जाता है तो यहां डॉक्टर चैक कर रिपोर्ट तो बना देते हैं, लेकिन इसके बाद असली परेशानी मरीज व उसके साथ आए लोगों के साथ होती है। डॉ. चैकअप करने के बाद दवाई लिखकर तो चले जाते हैं लेकिन इसके बाद जैसे मरींज का एक्सरे कराना हो तो स्ट्रेचर ही नहीं मिल पाता, जिस कारण घायल को या तो परिजन या उसके साथ आए लोग अपने साथ किसी तरह एक्सरे रूम तक ले जाते हैं। बात यहां तक तो ठीक थी लेकिन इसके बाद एक्सरे रूम में पहुंचने के बाद पता चलता है कि लाइट नहीं आ रही तो घंटों एक्सरे के लिए इंतजार करना पड़ता है जबकि अस्पताल में लाइट के लिए जनरेटर भी रखे गए हैं लेकिन सारी व्यवस्थाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। कोई देखने और सुनने वाला नहीं है।

फिल्म पर एक्स-रे बंद, एमएलसी के लिए भी नहीं दिए जा रहे
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग द्वारा सामान्य मरीजों के एक्स-रे फिल्म के साथ देना बंद कर दिए गए हैं। मोबाइल फोन मे एक्स-रे रिपोर्ट के फोटो खींचकर लाना पड़ते हैं। कई बार माइनर फ्रेक्चर दिखाई नहीं देता। यहां तक कि एमएलसी एक्स-रे भी एडमिशन फाइल में नहीं दिए जा रहे। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर डीन से लेकर सिविल सर्जन को पत्र लिख चुके हैं। हाल ही में डॉक्टर रूम के अंदर रेडियोलॉजी विभाग ने पर्चे चिपका दिए हैं कि मरीजों के एक्स-रे रिपोर्ट देखने कक्ष में आएं।

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