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खून पसीना एक कर मुझे लाड करते है, मेरी खुशी के लिए पापा दिन रात एक करते है-Shivpuri News

 स्वर्गीय बल्लभदास गोयल स्मृति कवि सम्मेलन आयोजित

विरही सहित कई साहित्यकार व पत्रकरों का हुआ सम्मान 
शिवपुरी। दिवंगत समाजसेवी बल्लभदास गोयल की स्मृति में चतुर्थ कवि सम्मेलन कम्युनिटी हाल में संपन्न हुआ। जिसमें तमाम साहित्यकारों व पत्रकारों का सम्मान किया गया। सर्वप्रथम मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर व सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, तत्पश्चात परशुराम शुक्ल विरही, हरिश्चन्द्र भार्गव, डॉ. एचपी जैन, पुरषोत्तम गौतम, प्रमोद भार्गव, अरुण अपेक्षित, शकील नश्तर, प्रदीप सुकून व सुरेन्द्र शर्मा का स्वागत अमन गोयल, आशुतोष शर्मा, विकास प्रचंड, दिव्या भागवानी, मयंक राठौर, प्रियंका राजपूत, रिया माथुर, अजय गौतम, विक्रम गंगोरा, कपिल पाराशर आदि के द्वारा किया गया। कार्यक्रम की भूमिका कार्यक्रम संयोजक आशुतोष शर्मा ने रखी। विरही ने स्वर्गीय बल्लभदास गोयल का स्मरण करते हुए लंबे समय तक उनके द्वारा कराए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जानकारी व आयोजन समिति को आशीष प्रदान किया। जिसके बाद कवि सम्मेलन प्रारंभ हुआ जिसमें कोलारस से आए आशीष शर्मा ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा, सुनो कागज पर आज एक बात लिखता हूं, न कोई गजल न शायरी बस अपने जज्बात लिखता हूं। 
पीहू शर्मा ने कहा खून पसीना एक कर मुझे लाड करते है, मेरी खुशी के लिए पापा दिन रात एक करते है।
प्रियंका राजपूत ने कहा मुझे सिर्फ एक जिंदगी मिली है, में इसे जीना चाहती हूं। मयंक राठौर ने कहा में चाहता इश्क की बोली लिख जाती क्रांति की बोली। करैरा से आये शुभाष पाठक जिया ने हर एक दिन को मैं कह नही सकूंगा पर, वह एक दिन है न इतवार हा तुम्हारा है। पोहरी से आए दीपक शर्मा ने जब-जब आंखे उठेगी मेरे देश पर, तब होंसलो से हर जंग जीती जाएगी। विकास प्रचंड ने गौरवशाली अतीत अपना गाता रहूं तराना, भारत की माटी का कण-कण वीरता का है। दिव्या भागवानी ने आज चांदनी मुस्कुराई है, हाथों में गुलाल लेकर आई है। लाल गुलाल उसने चांद के मुखड़े पर लगाया है, देखो रंगीन चांद कितना खूबसूरत नजर आया है कि प्रस्तुति दी। 
अन्य कवियों में प्रदीप अवस्थी, अजय गौतम, विनीत यादव, राकेश मिश्रा, रिया माथुर, रमन शर्मा, लक्ष्मणलाल जैन ने भी कविताएं प्रस्तुत की। इसके बाद शिवपुरी के वरिष्ठ कवि क्रम में आकर प्रदीप सुकून ने मुक्तक रुबाई पेश की सीने में न सूरत पलने लगती है, गांव घर बस्ती जलने लगती है, सदी या लगती है ठंडी होने में, जब होली दिल मे जलने लगती है। आशुतोष ओज ने भगत सिंह राजगुरु सुखदेव अमर आजाद प्रतापी आज, अंग्रेज हुए थे कंपित जिनसे छोड़ भगे थे तख्तों ताज, सुनाई। वरिष्ठ कवि अरुण अपेक्षित ने ये होली आनन्द की, भूल सभी अवसाद जला, घृणा की होलिका बचा प्रेम प्रहलाद प्रस्तुत की। हास्य व्यंग्य के कवि राजकुमार चौहान व राम पंडित ने क्रमशः नेताओ और पत्नी की चालीसा प्रस्तुत कर सभी को ठहाके लगाने पर विवश किया।  
 इसके बाद आए दिनेश वशिष्ठ ने चुटीले अंदाज में किस्सा सुनाया एक बार एक सज्जन पूछने लगे, क्या गारंटी है कि तुम कवि हो, कविता के आकाश के उदीयमान रवि हो, ये कैसे सिद्ध हो कि कविताएं लिखते हो, हमको तो तुम कोई बुद्धिमान लगते हो सुनाकर सभी की वाहवाही लूटी। डॉ. एचपी जैन ने अपने सुमधुर अंदाज में जिंदगी को जीना प्रेम से, मिलती नहीं बार बार सुनाकर सभी का दिल जीता। सुरेन्द्र शर्मा ने जिसको हो कोई दिक्कत वह चला जाए पाकिस्तान सुनाई। अंत मे वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र भार्गव ने ये होली दिल की होली है आओ सब हिल मिल जाए, रंगों में डूबे ऐसे सब भेदभाव को भूल जाए सुनाई। इसके बाद पुरषोत्तम गौतम ने आशीष वचन प्रेमशंकर शर्मा ने आभार प्रदर्शन व कवि सम्मेलन का सफल संचालन दिव्या भागवानी व विकास प्रचंड ने किया।

 

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