कचरा पृथक करने से पूर्ब ही खुर्द-बुर्द हुआ सेंटर
शाशन की महत्वाकांक्षी योजना पर जिम्मेदारों ने फेरा पानी
शिवपुरी: पोहरी नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत श्योपुर रोड पर बना कचरा घर को नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी के खुर्द बुर्द कर दिया गया हैं.
जानकारी अनुसार पोहरी नगर परिषद के कचरा घर पर एमआरएफ निर्माण कार्य जिसकी लागत 16 लाख 25 हजार रुपए है वही एफएसटीपी का निर्माण कार्य नगर परिषद के ठेकेदार ने 7 लाख 78 हजार रुपए की लागत से हुआ था लेकिन अब वर्तमान में धरातल पर शून्य है मतलब सीधा सीधा कहे तो अब खंडर हालत में नजर आ रहे है
नगर से निकलने वाले कचरे में से फिर इस्तेमाल होने वाला कचरा को पृथक करने के लिए बनाया एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) पिछले एक साल से खंडर हालत में है। हैरानी की बात यह है कि एक साल से रियूजेबल (फिर से इस्तेमाल में आने वाले कचरे) का यहां से उठान नहीं हुआ है। संवाददाता धर्मेंद्र शर्मा ने पड़ताल की तो सामने आया कि कचरा उठान करने के लिए नगर परिषद को अब तक कोई एजेंसी नहीं मिली है। जिले में एक एजेंसी से टाइअप करने का प्रयास किया गया, लेकिन सिरे नहीं चढ़ा। यहां से दोबारा प्रयोग होने वाले कचरे का नियमित उठान जरूरी है वरना कचरा पृथक करने की प्रक्रिया भी इससे प्रभावित होगी। अधिकारियों की मानें तो जिला स्तर पर प्रयास विफल रहने पर अब संभाग की दो एजेंसी से बातचीत चल रही है।
नगर से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए नगर परिषद ने डेढ़ साल पहले पोहरी श्योपुर रोड के समीप एमआरएफ बनाया था। एमआरएफ सेंटर बनाने का उद्देश्य था कि नगर से निकलने वाले कचरे में से आधा यहीं निस्तारित किया जा सके और बचा हुआ कचरा ही डंपिंग यार्ड पर डाला जा सके। संवाददाता धर्मेंद्र शर्मा ने मंगलवार को एमआरएफ सेंटर का निरीक्षण किया तो यहां पृथक कचरे के ढेर लगे मिले। पड़ताल में सामने आया कि यहां पड़े दोबारा इस्तेमाल होने वाले कचरे जैसे लोहा, प्लास्टिक, कांच आदि का उठान नहीं हो पा रहा है। एक साल से कचरा पृथक किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एमआरएफ सेंटर के निर्माण के दौरान ही एजेंसी से टाइअप करने की रूपरेखा तैयार की गई थी, लेकिन अधिकारियों के तबादले के साथ ही यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई। नए अधिकारियों ने तैयार एमआरएफ सेंटर को तो चालू करवा दिया, लेकिन एजेंसी को ढूंढने की कवायद अब तक सिरे नहीं चढ़ी है। गत दिनों में ही लेकिन एजेंसी ने इस काम के लिए असमर्थता जताई। अब नगर परिषद अधिकारियों की ग्वालियर की दो एजेंसी से बातचीत चल रही है।
एमआरएफ सेंटर पर आठ पिट, सभी कचरे से लबालब
संवाददाता ने मंगलवार दोपहर एमआरएफ सेंटर पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो टीन शेड ,गेट ,खिड़की, लोहे के एंगल सरिया ,पानी की टंकी दरवाजे , लाइट फिटिंग, नल फिटिंग कनेक्शन आदि गायब मिले कचरे की भरमार मिली। इसके अलावा कांच, रबड़, प्लास्टिक, लोहे, गत्ते के कचरे को पृथक करने के लिए बनाए गए आठ पिट कचरे से लबालब मिले। सूत्रों के अनुसार एजेंसी हायर न होने के चलते यहां से कचरे का उठान नहीं हो पा रहा है।
प्रतिदिन निकलता है 20 वाहन कचरा
कचरे को एमआरएफ सेंटर के अलावा डंपिंग यार्ड पर डाला जा रहा है। नगर में नगर परिषद के करीब 15 वाहन कचरे का उठान करते हैं। वार्डों में घर घर जाकर भी कचरे का उठान किया जा रहा है। इसके अलावा दस से अधिक अस्थायी डंपिंग प्वाइंट बनाए गए हैं, जिन पर लोग कचरा डालते हैं। वहां से ट्रैक्टर ट्रॉली के जरिये कचरे का उठान होता है।
टेंडर को डेढ़ साल बीता, डंपिंग यार्ड के कचरा निस्तारण का प्रोजेक्ट नहीं हुआ शुरू डंपिंग यार्ड पर नगर परिषद पिछले करीब पांच साल कचरा डाल रही है। यहां कचरे की मात्रा काफी ज्यादा है, जिसके चलते जगह का अभाव बना हुआ है। इस कचरे के निस्तारण के लिए लाखों रुपये का खर्च आना है। अब तक डंपिंग यार्ड पर कचरे के निस्तारण का काम शुरू नहीं हुआ है। सरकार के निर्देशानुसार काम शुरू करवाने के थर्ड पार्टी का इंतजार है इसके बाद एमआरएफ सेंटर से पृथक किए गए कचरे के उठान की समस्या नहीं रहेगी।








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