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ई-रिक्शा की सर्विस नहीं करना कंपनी को भारी पड़ा: उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने वृद्ध आश्रम को नया ई रिक्शा देने का फैसला सुनाया / Shivpuri News

शिवपुरी: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के प्रधान न्यायाधीश, अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा और दो सदस्यों अंजू गुप्ता व राजीव कृष्ण शर्मा ने सेवा में कमी के मामले में ग्वालियर की एमएस विहर्ष ट्रेडर्स कंपनी को अपना घर आश्रम को एक नई ई रिक्शा देने के आदेश दिया है। रिक्शा न देने पर उसकी कीमत का भुगतान कंपनी को करना होगा। मामले में पीड़ित पक्ष से पैरवी एडवोकेट संजीव बिलगैया ने की।

अभियोजन के मुताबिक शिवपुरी शहर के बड़ौदी स्थित अपना घर आश्रम संचालक रमेश चंद्र अग्रवाल ने आश्रम के लिए एक ई रिक्शा 7 मार्च 2022 को ग्वालियर की एमएस विहर्ष कंपनी से एक लाख 31 हजार रुपए में खरीदा था। एक माह बाद भी रिक्शा में खराबी आ गई और जब रमेश चंद्र अग्रवाल ने कंपनी को रिक्शा गारंटी अवधि में होने पर सही करने की बात कही तो कंपनी ने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से रिक्शा सही कराने के नाम पर 5 हजार रुपए भी ले लिए और रिक्शा सही भी नहीं हुआ। जब कंपनी ने कोई संतोषजनक जबाब नहीं दिया तो पीड़ित रमेश चंद्र अग्रवाल ने अपने वकील के माध्यम से परिवाद जिला उपभोक्ता प्रतितोषण विवाद आयोग में लगाया।

मामले में कोर्ट ने संबंधित कंपनी को नोटिस दिया लेकिन वह कोर्ट के सामने प्रस्तुत नहीं हुई। इस पर से कोर्ट ने एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए कंपनी को दोषी माना और आदेश दिए कि कंपनी ई रिक्शे को निशुल्क पूरी तरह से सही करें, नहीं तो नया रिक्शा दें। रिक्शा न देने की स्थिति में एक लाख 31 हजार रुपए वापस करें। इसके साथ ही कंपनी को पीड़ित की मानसिक परेशानी के 8 हजार रुपए व प्रकरण व्यय के 2 हजार मिलाकर 10 हजार रुपए देने होंगे। अगर कंपनी एक माह के अंदर यह नहीं करती तो उसे 1 लाख 31 हजार रुपए पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

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