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शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में POCSO Act-2012 के बारे में छात्रायों को जागरूक किया | Shivpuri News3

शिवपुरी। शासकीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुरी में आज दिनांक 20.09.2019 को महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को पोस्को एक्ट 2012 के बारे में विशेष जानकारी उपलब्ध कराई गई.इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती शिखा शर्मा (जिला विधिक सहायता अधिकारी) को आमंत्रित किया गया. इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो महेंद्र कुमार डॉ पदमा शर्मा प्रो मधुलता जैन प्रो मंजूलता गर्ग प्रो ममता रानी प्रो दिग्विजय सिंह सिकरवार डॉ रामजी दास राठौर डॉ साधना रघुवंशी डॉ मंजू वर्मा प्रो अंशु जैन प्रो रंजना पटेरिया प्रो संजय चौधरी देवेंद्र वरुण प्रो दर्शन लाल प्रो केदार श्रीवास के साथ महाविद्यालय के अन्य सदस्य एवं अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। 

पाक्सो एक्ट पर जानकारी देते हुए जिला विधिक सहायता अधिकारी शिखा शर्मा ने कहा कि लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत नाबालिग बच्चों के साथ दुष्कर्म, यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है। इस एक्ट के जरिए बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान होती है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत अलग-अलग अपराध में अलग-अलग सजा का प्रावधान है और यह भी ध्यान दिया जाता है कि इसका पालन कड़ाई से किया जा रहा है या नहीं। इस एक्ट की धारा 4 में वो मामले आते हैं जिसमें बच्चे के साथ कुकर्म या फिर दुष्कर्म किया गया हो। इस अधिनियम में सात साल की सजा से लेकर उम्रकैद तक का प्रावधान है साथ ही साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं एक्ट की धारा 6 के अधीन वो मामले आते हैं जिनमें बच्चों के साथ कुकर्म, दुष्कर्म के बाद उनको चोट पहुंचाई गई हो। इस धारा के तहत 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर धारा 7 और 8 की बात की जाए तो उसमें ऐसे मामले आते हैं जिनमें बच्चों के प्राइवेट पार्ट्स या गुप्तांग में चोट पहुंचाई जाती है। इसमें दोषियों को 5 से 7 साल की सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। 18 साल से कम आयु के किसी भी मासूम के साथ अगर दुराचार होता है तो वह पॉक्सो एक्ट के तहत आता है। इस एक्ट के लगने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त एक्ट की धारा 11 के साथ यौन शोषण को भी परिभाषित किया गया है। जिसका मतलब है कि यदि कोई भी व्यक्ति अगर किसी बच्चे को गलत नीयत से छूता है या फिर उसके साथ गलत हरकतें करने का प्रयास करता है या उसे पॉर्नोग्राफी दिखाता है तो उसे धारा 11 के तहत दोषी माना जाएगा। इस धारा के लगने पर दोषी को 3 साल तक की सजा हो सकती है।
         समाज में बढती कुंठा और बच्चों के ऊपर बढ़ते यौन अपराधों के दृष्टिगत समाज मे हम सभी को जागरुक रहकर कानूनी प्रावधानों को जानने और समझने की जरूरत है और बच्चों की लैंगिक शोषण से सुरक्षा करने की जरूरत है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो महेंद्र कुमार ने छात्र-छात्राओं को समझाइश दी कि आप महाविद्यालय में स्वस्थ वातावरण बनाए रखें तथा किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने की स्थिति में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं प्राचार्य कक्ष पर संपर्क कर सकते हैं. हमारे महाविद्यालय में सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. जिससे महाविद्यालय का माहौल पूर्ण रूप से सुरक्षात्मक बना रहे. कार्यक्रम के अंत में प्रो मंजूलता गर्ग द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया तथा कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. दिग्विजय सिंह सिकरवार द्वारा किया गया

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