
शिवपुरी। आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रभारी संयोजक की कुर्सी पर नियमों से परे जाकर पदस्थ बीके माथुर को कलेक्टर शिल्पा गुप्ता ने सोमवार को रिलीव कर दिया है। विवादास्पद प्रभारी संयोजक बीके माथुर पिछले तीन माह से ट्रांसफर ऑर्डर होने के बाद भी शिवपुरी में डटे हुए थे। वन विभाग में मानचित्रकार बीके माथुर प्रतिनियुक्ति पर पिछड़ा वर्ग विभाग में पदस्थ किए गए थे, लेकिन यह पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अलावा अधिकारियों से सांठगांठ करके आदिम जाति कल्याण विभाग में बतौर प्रभारी की कुर्सी पदस्थ हो गए थे। इस दौरान इनका कार्यकाल काफी विवादों में रहा। खासकर छात्रावासों के संचालन में राशि की बंदरवाट, आदिवासियों के लिए प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार की राशि का सही आवंटन न होने के कारण यह विवादों में थे। इसके अलावा आदिम जाति कल्याण विभाग की कई योजनाओं में पिछले डेढ़ साल में घपले हुए हैं जिनकी जांच की मांग कई बार हो चुकी है।
खेल मंत्री ने भी हटाने के लिए कहा था
खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने भी बीके माथुर की विवादास्पद कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। कलेक्ट्रेट में एक बैठक के दौरान समस्त अधिकारियों के सामने कलेक्टर को खेल मंत्री ने निर्देशित किया था कि इनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर इन्हें वापस इनके मूल विभाग में भेजा जाए।
पिछले डेढ़ साल में हुए काफी घपले
आदिम जाति कल्याण विभाग में पिछले डेढ़ साल में अनु. जाति, जन जाति वर्ग के हितग्राहियों के लिए आने वाली राशि में बड़े पैमाने पर घपले हुए हैं जिसमें शिवपुरी में पदस्थ रहे एक पूर्व आईएएस और कलेक्टर राजीवचंद दुबे की भी शिकायत लोकायुक्त में हुई है जिसमें आदिवासियों के लिए आई सामग्री की खर्च राशि में नियमों से परे जाकर काम हुआ जिसकी शिकायत एक अभिभाषक द्वारा की गई है जो जांच के नाम पर लंबित है। अगर इसकी निष्पक्ष जांच होती है तो कई अधिकारी घेरे में आएंगे।
धोखाधड़ी में भी है आरोपी
कोतवाली में दर्ज एक मामले में प्रभारी संयोजक पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है जिसमें एक बैंक से लोन दिलाने के नाम फर्जी कागज लगाए गए थे। इस मामले में प्रभारी संयोजक बीके माथुर पर एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन इनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी और मामला जांच के नाम पर लटका पड़ा है। एफआईआर होने के बाद भी इन्हें हटाया नहीं गया था।






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