
(हरीश भार्गव/शीलकुमार यादव) कोलारस/बदरवास-कोलारस विधानसभा क्षेत्र के लिए सम्पन्न हुये उप चुनाव को ढाई माह बीत चुका है। इन ढाई माह के दौरान न तो भाजपा की सरकार ने भूमि पूजन, शिलन्यास, घोषणाओ पर अमल किया और न ही निर्वाचित विधायक द्वारा इन ढाई माह के दौरान कोई विशेष कार्य किया। क्षेत्र की जनता पूर्व की तरह आज भी भाजपा की घोषणाओ पर अमल होने तथा निर्वाचित विधायक के द्वारा घोषणाओ पर अमल न होने के विरोध का इंतजार कर रही है। दोनो ही दल चुनाव के बाद घोषणाओ से लेकर लोगो की समस्याओ को नजर अंदाज कर चुके है। क्षेत्र की जनता के पास कांग्रेस एवं भाजपा दो ही विकल्प नजर आते है। उन्ही में से जनता को एक दल पर अपनी मोहर लगाना मजबूरी है। क्यो कि तीसरा दल बसपा समाज विशेष से आगे निकलने में कामयाव कम से कम कोलारस विधानसभा में नही हो पाया है। जिसका लाभ कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा को मिलता रहा है। किन्तु इस वर्ष नवम्बर – दिसम्बर माह में 6 माह के अंदर सम्पन्न होने बाले प्रदेश भर के विधानसभा चुनावो में कोलारस में जीत की चावी बसपा के हाथो में दिखाई दे रही है।
बसपा की घोषणा के साथ ही कोलारस विधानसभा का अगला विधायक होगा तय
कोलारस विधानसभा क्षेत्र का अगला विधायक जनता को ही तय करना है, यह बात सही है किन्तु चुनावो में राजनैतिक चालो पर भी जीत हार का फैसला लिखा जाता है। और प्रदेश भर में होने बाले आम चुनावो के साथ कोलारस विधानसभा के लिए सम्पन्न होने बाले विधानसभा के चुनावो में इस बार जीत की चाबी बसपा की जेव में दिखाई दे रही है। आगामी विधानसभा के चुनावो में कांग्रेस से बर्तमान विधायक का टिकिट लोग जीत के कारण तय मान कर चल रहे है। वहीं सत्ताधारी भाजपा से पूर्व विधायक देवेन्द्र जैन के अलावा एक दर्जन अन्य कार्यकर्ताओ के नाम भी भाजपा से टिकिट की लाईन में दिखाई दे रहे है। पूर्व विधायक देवेन्द्र जैन यदि उप चुनाव के बाद चुनाव न लडने की कसम खाने पर कायम रहते है तो भाजपा से आम चुनाव में नया चेहरा जनता के बीच दिखाई देे सकता है। उप चुनाव में बसपा के चुनाव मैदान में न होने से कांग्रेस को 8 हजार के करीब मतो से जीत मिली थी। वहीं इस बार कोलारस विधानसभा क्षेत्र में यदि बसपा चुनाव मैदान में दिखाई देती है तो जीत हार किसी की भी हो सकती है। बसपा के आम चुनाव में लडने अथवा गठवंधन करने को लेकर चर्चाओ का बाजार गर्माया हुआ है। बसपा के फैसले के बाद ही कोलारस विधानसभा चुनाव की तस्वीर साफ होगी।
बसपा कांग्रेस से गठबंधन करती है तो कांग्रेस की जीत,
चुनाव लडती है तो भाजपा को मिल सकती है कामयाबी
वर्ष के अंत में मध्य प्रदेश में होने बाले विधानसभा चुनावो के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार ने प्रशासनिक सर्जरी के माध्यम से चहेते अधिकारियो को विधानसभा मुख्यालयो पर विठालना प्रारंभ कर दिया है। प्रशासनिक मशीनरी का चुनावो में लाभ एक अलग विषय है वहीं दूसरी ओर राजनैतिक चाल भी चुनावो में मुख्य भूमिका निभाती है। कोलारस विधानसभा क्षेत्र की हम बात कर रहे है। तो यहां होने बाले विधानसभा के चुनाव से पूर्व यदि बसपा का मध्य प्रदेश में कांग्रेस से महा गठवंधन होता है तो कोलारस विधानसभा क्षेत्र से इस बार भी तीसरी बार लगातार कांग्रेस को सफलता मिलना तय है। और यदि बसपा का गठबंधन नही होता है तो और बसपा अपने कार्यकर्ता को चुनाव मैदान में उतारती है तो इसका लाभ भाजपा के प्रत्याशी को कामयावी दिला सकता है। और यदि बसपा कांग्रेस अथवा भाजपा के दिग्गज नाराज नेता पर दाब खेलती है तो ऐसी स्थिति में कोलारस विधानसभा क्षेत्र का चुनाव त्रिकोणिय होने के साथ रोचक हो सकता है। ऐसी स्थिति में जीत किसी की भी हो सकती है।






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