मामला करैरा मुठभेड़ का, अगली सुनवाई 16 को
शिवपुरी। ग्वालियर उच्च न्यायालय के न्यायामूर्ति जीएस अहलूवालिया ने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक को 2006 में हुई करैरा पुलिस करैरा पुलिस डकैत मुठभेड़ की जाँच एडीशनल एसपी स्तर के अधिकारी से कराने के आदेश दिए हैं, साथ ही इस मामले में आरोपी दो पुलिसकर्मी एसआई राजवीर सिंह गुर्जर तथा आरक्षक राघवेन्द्र शुक्ला को तत्काल निलंबित करने को कहा है। प्रकरण की अगली सुनवाई 16 मई को होगी। सुनवाई के दौरान शिवपुरी पुलिस अधीक्षक सुनील पांडे एवं करैरा थाना प्रभारी प्रदीप वाल्टर ने न्यायालय में सील पैक केस डायरी प्रस्तुत की, जिसे न्यायालय के सामने खोला गया। न्यायालय ने एसपी से कहा कि केस डायरी में कोई छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
जानें क्या है पूरा मामला
3 अप्रैल 2006 को करैरा थाने के एसआई राजवीर सिंह गुर्जर एवं आरक्षक राघवेन्द्र शुक्ला को सूचना मिली कि डकैत उमाराव बुंदेला एवं हेमराज नट को ग्राम पपरेडू के नारायण सिंह रावत, सुमेर सिंह रावत के डेरा एवं गन्ने के खेतों की तरफ जाते देखा गया है। पुलिसकर्मी जब वहां पहुंचे तो एक व्यक्ति सुमेर सिंह के खेत की तरफ भागा। उसी समय डकैतों की ओर से फायर किए गए तो आरक्षक राघवेन्द्र शुक्ला ने भी फायर कर दिया। इस पर वहां मौजूद तीन व्यक्ति डरकर रुक गए उनमें से एक गोली लगने से घायल था जिसने अपना नाम हाकिम सिंह रावत बताया। दूसरे ने परमाल सिंह रावत और तीसरे ने जितेन्द्र रावत। बाद में एसआई राजवीर सिंह की रिपोर्ट पर डकैत उमाराव बुंदेला एवं हेमराज नट के खिलाफ धारा 307 का मामला दर्ज किया गया। डकैत उमराव व हेमराज नट के फरार होने से उनके खिलाफ धारा 299 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया।
पुलिस में दर्ज कराई थी एफआईआर
गोली लगने से घायल हाकिम सिंह ने लिखित शिकायत की थी कि राजवीर सिंह गुर्जर व एक अन्य ने बंदूक से गोली मारी जिस पर करैरा में मामला दर्ज किया गया था जिसकी जाँच अभी लंबित है। उच्च न्यायालय द्वारा 25 नवंबर को इस मामले में पारित आदेश के पालन में गिरफ्तारी नहीं होने से चालन पेश नहीं हो सका है।
जारी हो चुके हैं नोटिस
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी जांच नहीं होने पर उच्च न्यायालय ने प्रकरण से संबंधित छ: थाना प्रभरियों व छ सब इंस्पेक्टर के खिलाफ नोटिस जारी किए थे।






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