
शिवपुरी। एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज द्वारा जारी आंदोलन आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। आंदोलनकारियों का मुख्य गुस्सा भाजपा सरकार के प्रति साफ नजर आ रहा है। हालांकि यह बात सत्य है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के संशोधन के मुद्दे पर भाजपा सहित सभी दलों ने संशोधन का समर्थन किया था। सवर्ण समाज के आंदोलन से अधिकतर वैश्य, ब्राह्मण और ठाकुर मतदाता जुड़े हुए हैं जो भाजपा के परम्परागत मतदाता माने जाते हैं। शिवपुरी जिले में जिस तरह से सवर्ण आंदोलन को समर्थन हासिल हुआ उससे भाजपा की चिंता बढऩा स्वाभाविक है। शिवपुरी सहित कोलारस, बदरवास, पोहरी, बैराड़, करैरा, पिछोर और खनियांधाना में सवर्ण समाज के बंद को शत प्रतिशत सफलता हासिल हुई। पिछले लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को यदि देखें तो सवर्ण मतदाताओं में से 54 प्रतिशत मतदाताओं ने भाजपा को समर्थन दिया जिसके कारण केन्द्र में भाजपा अपने बलबूते पर सत्ता में आने में सफल हुई और उसे 282 सीटों पर अकेले सफलता हासिल हुई जबकि कांग्रेस को महज 12 प्रतिशत सवर्ण मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ। इसलिए आशंका है कि यदि सवर्ण आंदोलन गहराया तो आगामी विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक नुकसान भाजपा को ही होगा, क्योंकि भाजपा मूल रूप से बनिया और ब्राह्मणों की ही पार्टी मानी जाती है और यह वर्ग भाजपा का मजबूत वोट बैंक है, लेकिन नए हालात में इस वर्ग की भाजपा से साफतौर पर नाराजगी देखने को मिल रही है। भाजपा के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह सवर्ण आंदोलन से किस तरह से निपटे जिससे उसे राजनैतिक रूप से नुकसान न उठाना पड़े। खास बात यह है कि इस आंदोलन से जुड़े अधिकांश लोगों में भाजपाईयों की संख्या ही अधिक नजर आ रही है और वह अप्रत्यक्ष रूप से आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।






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