(हरीश भार्गव) बदरवास-बदरवास में भारतीय रेलवे एवं भू-अर्जन प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है। यहाँ रेलवे स्टेशन से नगर के लिए पहुँच मार्ग निर्माण हेतु वर्ष 1988 में एक किसान की भूमि को अधिग्रहण करने का आदेश तो किसान को दिया लेकिन उसके बाद तात्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान को सरकारी काम में बाधा न डालने का डर बताकर बिना मुआवजा दिए और अधिग्रहण की प्रिक्रिया पूरी किए बिना ही जबरन रोड़ निर्माण कर दिया जो कि अवैध है। उसके बाद से अब तक 30 वर्ष तक किसान स्थानीय कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक को शिकायत कर चुका लेकिन अभी तक किसान की भूमि से सरकार का अवैध अतिक्रमण नहीं हट सका और न ही किसान को उसकी भूमि का मुआवजा मिला है। किसान की जीविका का एक मात्र स्त्रोत भूमि पर 30 वर्ष में उपज का नुकसान झेलने के साथ-साथ किसान को प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों में मानसिक उत्पीडऩ भी झेलना पड़ा है। अब किसान ने पिछले 30 वर्षों में सभी सरकारों के 8 प्रधानमंत्रियों के कार्यकालों में रहे 20 रेल मंत्रियों का किसान की भूमि पर जबरन अवैध सरकारी अतिक्रमण करने के लिए सभी का आभार ज्ञापित किया है और मांग की है कि बिना आत्महत्या किए ही किसानों को उनका हक़ मिलना चाहिए।
प्रशासनिक अधिकारियों की मानसिक उत्पीडऩा झेलने को मजबूर किसान
(हरीश भार्गव) बदरवास-बदरवास में भारतीय रेलवे एवं भू-अर्जन प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है। यहाँ रेलवे स्टेशन से नगर के लिए पहुँच मार्ग निर्माण हेतु वर्ष 1988 में एक किसान की भूमि को अधिग्रहण करने का आदेश तो किसान को दिया लेकिन उसके बाद तात्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान को सरकारी काम में बाधा न डालने का डर बताकर बिना मुआवजा दिए और अधिग्रहण की प्रिक्रिया पूरी किए बिना ही जबरन रोड़ निर्माण कर दिया जो कि अवैध है। उसके बाद से अब तक 30 वर्ष तक किसान स्थानीय कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक को शिकायत कर चुका लेकिन अभी तक किसान की भूमि से सरकार का अवैध अतिक्रमण नहीं हट सका और न ही किसान को उसकी भूमि का मुआवजा मिला है। किसान की जीविका का एक मात्र स्त्रोत भूमि पर 30 वर्ष में उपज का नुकसान झेलने के साथ-साथ किसान को प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों में मानसिक उत्पीडऩ भी झेलना पड़ा है। अब किसान ने पिछले 30 वर्षों में सभी सरकारों के 8 प्रधानमंत्रियों के कार्यकालों में रहे 20 रेल मंत्रियों का किसान की भूमि पर जबरन अवैध सरकारी अतिक्रमण करने के लिए सभी का आभार ज्ञापित किया है और मांग की है कि बिना आत्महत्या किए ही किसानों को उनका हक़ मिलना चाहिए।More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »
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