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मर्यादा का मान सरोवर साहस भी शीश झुकाता है, सर्वस्य समर्पित कर अपना प्राणों की बली चढ़ता है

आगमन संस्था शिवपुरी की काव्य गोष्ठी का आयोजन  
शिवपुरी। साहित्यिक संस्था आगमन द्वारा गत दिवस वीर सावरकर पार्क में काव्यगोष्ठी का आयोजन राकेश मिश्रा की अध्यक्षता में किया गया। सर्व प्रथम मां शारदा को भक्ति सुमन अर्पित करते हुए काव्यगोष्ठी का शुभारंभ राजेन्द्र शर्मा राही ने श्रृंगार रस रचित रचना मे सुनाया ‘अपना घूंघट जरा हटा दीजिए, चांद हमको दिखा दीजिए, सभी श्रोताओं ने भरपूर समर्थन दिया। इसी तरह अगले क्रम मे नई सोच के धनी शरद गोस्वामी ने पढ़ा ‘तुम मेरी हालत से बेखबर हो, तुम्हे हमारी खबर नही है, श्रोताओं के दिल से होकर गुजरी तो तालियों से उनका अभिवादन हुआ। ओज की ओजस्विता के परिचायक विकास शुक्ल प्रचंड ने अपनी आंदोलित करने वाली काव्य को पढ़ते हुये सुनाया ‘हम गीता गंगा गो माता के संस्कारों पे चलते हैं, हम गायत्री के मंत्रों के साये मे पल पल पलते हैं। श्रोताओं का पूर्ण समर्पण तालियों के रूप मे प्राप्त हुआ।
इसके बाद आगमन संस्था के वरिष्ठ कवि राकेश मिश्रा ने बेटियों को समर्पित रचना ‘कब तक होगी धरा कलंकित होती इन हत्याओं से, पूछ रही हैं आज बेटियां अफ सर और नेताओं से सभी के द्वारा सराही गई। अगले क्रम मे युवा कलाम मृदुल शर्मा मोंटी ने कहा ‘तेरे शहर से मेरा गांव अच्छा है शहर में अब क्या रखा है। अंत मे कवि अजय जैन अविराम ने सैनिकों के सम्मान मे सुनाया ‘मर्यादा का मान सरोवर साहस भी शीश झुकाता है, सर्वस्य समर्पित कर अपना प्राणों की बली चढ़ता है। श्रोताओं ने तालियों से भरपूर आशीर्वाद दिय। आयोजन मे अंशुल गर्ग, राहुल, अंशुल मोदी, रचित अग्रवाल ने भी अपना सराहनीय योगदान देकर आयोजन को सफलता पर पहुंचाया। समापन पर आभार प्रगट करते हुये राजेन्द्र शर्मा ने सभी को धन्यवाद दे कर आयोजन को पूर्णता पर पहुंचाया।
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