
शिवपुरी-आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह के माध्यम से महिलाए स्वयं आत्म निर्भर बनने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही है। जिसका जीता-जागता उदाहरण ग्राम टोंगरा निवासी श्रीमती सुनीता आदिवासी एवं उनके समूह की अन्य महिलाओं द्वारा बनाए गए पेपर बैगों से उन्हें अच्छी खासी आमदनी हो रही है और महिलाओं को घर बैठे ही रोजगार मिल रहा है।
श्रीमती सुनिता आदिवासी एवं उनके समूह की अन्य महिलाओं द्वारा तैयार किए गए कागज के बैग लोगों को बहुत भा रहे है। ये बैग जहां रंग-बिरंगे होने के कारण आकर्षक और सस्ते भी है। इन बैगो का लोग अधिक से अधिक उपयोग कर रहे है और ये बैग पोलीथिन को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है, पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे रहे है।
समूह की महिला प्रमुख श्रीमती सुनिता आदिवासी ने बताया कि आजीविका मिशन के तहत स्वसहायता समूह की 12 महिलाओं ने पेपर बैग बनाने का भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त किया और पेपर बैग निर्माण हेतु उन्हें समूह से 10 हजार रूपए की राशि प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि वे एवं एक अन्य महिला द्वारा रंग-बिरंगी पेपर सीटों एवं सीनरी के अलग-अलग साईज के पेपर बैग बनाए जाते है। जो देखने मे आकर्षक होने के कारण हल्की बस्तुए रखने में भी काफी उपयोग साबित हो रहे है। उन्होंने बताया कि 15 रूपए की एक सीट में छोटे पांच, मध्यम आकार के तीन बैग और बड़े आकार के 2 बैग बनाते है। छोटे बैग की कीमत पांच रूपए प्रति बैग रहती है, जबकि मध्यम आकार के बैग की कीमत 15 रूपए प्रति बैग और बड़े आकार के बैग का मूल्य 20 रूपए प्रति बैग के हिसाब से दुकानदार उनसे खरीद रहे है। आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक डॉ.अरविंद भार्गव ने बताया कि इन बैगों की स्टेशनरी की दुकानों एवं जनरल स्टोरों पर काफी मांग है। आजीविका मिशन के माध्यम से भी इन बैगो की मार्केटिंग की व्यवस्था बड़े शहरों में की गई है।
केबिनेट मंत्री कर चुकी हैं कार्य की सराहना
खेल एवं युवा कल्याण, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने पिछले दिनों आजीविका एवं कौशल विकास दिवस के अवसर पर शिवपुरी में आयोजित स्वसहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनियों में रंग-बिरंगी कागज की सीट से बनाए गए बैगों की सराहना करते हुए समूह की महिलाओं से चर्चा कर मार्केटिंग की जानकारी ली। इस दौरान दर्शकों ने भी इन बैगों को खूब सराहा।






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