Press "Enter" to skip to content

वनकर्मी अपनी मांगों को लेकर चौथे दिन भी हड़ताल पर, वनों में माफिया सक्रिय, अवैध उत्खनन जोरों पर

शिवपुरी। वनकर्मियों की हड़ताल के आज चौथे दिन वन कर्मचारियों धरना आंदोलन के साथ रैली निकाल कर अपनी 19 सूत्रीय मांगों को लेकर मध्य प्रदेश वन कर्मचारी संघ एवं स्टेट फॉरेस्ट रेंज ऑफीसर्स (राजपत्रित)एसोसियेशन के प्रांतीय आह्वान पर जिले के समस्त वन कर्मचारी 24 मई से लगातार वन मंडल कार्यालय शिवपुरी के वाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। मांगों में मुख्य रूप से वनरक्षक से लेकर वन क्षेत्रपाल तक वेतन विसंगति को दूर करना वनों में घटित हो रहे संगीन अपराधों को ध्यान में रखते हुए वन-विभाग को सशस्त्र वन-बल के रूप में मान्यता देना, वनरक्षकों की नियुक्ति में संवधित अनियमितताओं को दूर करना इत्यादि हैं। हड़ताल पर बैठे रेंजरों में अनुराग तिवारी, विष्णु शर्मा , शैलेन्द्र सिंह तोमर, रामकुमार, कृष्णपाल धाकड़, महिपत सिंह राणा, इन्द्रसिंह धाकड़, महेश शर्मा, श्रीमती प्रीति शाक्य, उदभान मांझी ने अपनी उपस्थित दर्ज कराई। 
म.प्र. वन कर्मचारी संघ जिला शिवपुरी के जिलाध्यक्ष पुरूषोत्तम शर्मा ,दुर्गा ग्वाल व महिला अध्यक्ष श्रीमती रूकमणी भगत के निर्देशन में वन कर्मचारियों की लगातार चार दिनों से हड़ताल  पर हैं। वन कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से शासन को तेन्दुपत्ता संग्रहण से करोड़ों रूपए का राजस्व प्राप्त होता है वह गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा हैं। तेन्दुपत्ता संग्रहक अपने पारिश्रममिक के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। वनों में माफिया सक्रिय हो गए हैं। जिससे वनों में लगातार अवैध उत्खनन अवैध कटाई एवं शिकार की घटनायें अत्याधिक बड़ गई है। इसका ज्वलंत उदाहरण कल रात ही करैरा खोड़ में उप वन मंडलाधिकारी करैरा को मिली सूचना के आधार पर जंगल में अवैध रूप से चल रही जेसीबी मशीन को जप्त करना है। ऐसी अनेक घटनायें अन्य परिक्षेत्रों में भी लगातार हो रही हैं। वनाधिकारियों को लगातार सूचनायें भी मिल रही है। लेकिन वे किम कर्तव्य विमूक होकर मूक दर्शक वने वनों में अपराध घटित होते देख रहे हैं। वनों में इस दौरान आग की घटनायें, जंगली जानवरों द्वारा आमजनों पर आक्रमण की घटनायें देखने को मिल रही हैं। जब हड़ताल के खत्म करने से संबंधित प्रश्न रेंजर ऐसोसियेशन के वनवृत्तप्रभारी अनुराग तिवारी से पूछा गया तो उनका कहना है कि हम लोग फरवरी माह से अपनी विभिन्न गतिविधियों द्वारा शासन को लगातार सचेत करते आ रहे हैं लेकिन जैसा कि हमारा इतिहास रहा है कि विना नुकसान हुए या आंदोलन के बिना उग्र हुए शासन अपनी कुंभकर्णीय निद्रा से नहीं जागता है तो हम लोगों को मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ा है। हम कतई वनों से दूर जाना नहीं चाहते अब हम निश्चय कर चुके हैं कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी तब तक किसी भी कीमत पर हड़ताल वापस नहीं ली जायेगी। 
More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!